बरेली। दुनिया में जितने लोग उतनी बातें हैं। बच्चा हो या बड़ा सब के जीने, काम करने और जिंदगी गुजारने का अलग अलग अंदाज है। इसी में एक अंदाज रट के पढ़ने का है, यानी रटंत विद्या। इसी विषय पर मुंशी प्रेम चंद्र की लिखी कहानी ‘बड़े भाई साहब’ है, जिस पर नाटक का मंचन किया गया है। जो पढ़ाई में छोटे भाई के लिए बडे़ भाई का समर्पण भी दर्शाता है।
यह नाटक विंडरमेयर में मिनी थिएटर फेस्ट के तीसरे रोज प्रस्तुत किया गया। इस नाटक की कहानी में बड़े भाई और छोटे भाई जो हॉस्टल में रहकर पढ़ते हैं। बड़ा भाई कोर्स के लिए एक एक शब्द रट कर पढ़ता है ताकि पढ़ाई में बेहतर तरीके से आगे बढ़ सके। वहीं छोटा भाई खेल कूद में ज्यादा समय बिताता है। पढ़ता भी है तो बड़े भाई के डर से, वो भी उतना कि बस पास हो सके। इसके लिए वह अक्सर बड़े भाई से डाट भी खाता है। फिर भी बड़े भाई से बहुत प्यार करता है बड़ा भाई भी छोटे से बहुत प्यार करता है। इसी ताने बाने पर यह नाटक आगे बढ़ता है पास फेल होने की कहानी के साथ ही हॉस्टल की जिंदगी को भी दर्शाता है। अंत में डा. ब्रजेश्वर सिंह ने आभार व्यक्त किया। डा. गरिमा सिंह ने बताया कि मंगलवार को फेस्ट के अंतिम दिन ‘लागी छूटे न’ नाटक का मंचन शाम 7 बजे होगा।