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सौहार्द में गुजरे बचपन की याद दिलाता है ‘किल्लोल’

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बरेली। मुंशी प्रेमचंद स्मृति नाट्य समारोह में सोमवार को ‘किल्लोल’ नाटक का मंचन किया गया। मुंशी प्रेमचंद की कहानी गुल्ली-डंडा ओर चोरी को मिलाकर किल्लोल नाटक रंग प्रशिक्षु संस्था ने तैयार किया।
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संजय कम्युनिटी हाल में मंचित नाटक के सार में जाएं तो ‘किल्लोल’ हमें आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में बचपन की उन स्मृतियों की याद दिलाता है जो हमें आज भी गुदगुदाती हैं। लगता है कि काश बचपन फिर वापस आ जाएं। तब न जात पात था और न कोई भेदभाव पर आज सबकुछ बदल गया है।
नाटक गरिमा सक्सेना के निर्देशन में मंचित किया गया। प्रकाश परिकल्पना अमित रंगकर्मी की रही। नाटक में पात्रों की वेशभूषा, मंच सज्जा व कलाकारों की प्रस्तुति शानदार रही। संयोजक कुलभूषण शर्मा ने आभार व्यक्त किया। संचालनकविता अरोड़ा ने किया। इस मौके पर एडीएम ई आरएस द्विवेदी, विनय खंडेलवाल, गिरधर गोपाल खंडेलवाल, रणजीत पंचाले, आशीष गुप्ता, वरिष्ठ रंगकर्मी जेसी पालीवाल आदि मौजूद रहे। मीडिया प्रभारी गौरव वर्मा के अनुसार मंगलवार को ‘मंत्र’ नाटक का मंचन शाम सात बजे से किया जाएगा।
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