बरेली। एबीवीपी कार्यकर्ता और अन्य विद्यार्थी सुबह 10 बजे से ही बरेली कॉलेज के कॉमर्स विभाग में जुटने लगे थे, पर प्रॉक्टोरियल बोर्ड को इसकी भनक तक नहीं लगी। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने बार-बार इस बात को दोहराया कि उन्होंने इस मामले के संबंध में पांच दिन पहले ही प्राचार्य को मौखिक रूप से सचेत कर दिया था। यदि प्रशासन ने समय रहते इस पर ध्यान दिया होता तो यह हंगामा न होता।
इधर, चीफ प्रॉक्टर को पद से हटाने के मामले को लेकर भी विवाद पैदा हो गया है। बताया जा रहा है कि प्रो. आलोक खरे ने सोमवार को ही चीफ प्रॉक्टर पद से त्यागपत्र प्राचार्य को सौंप दिया था। बुधवार को जब परिसर में हंगामा हुआ तो प्राचार्य प्रो. ओपी राय ने उनको पद से हटाने का औपचारिक पत्र बनवाकर एबीवीपी कार्यकर्ताओं को सौंप दिया। कॉलेज प्रशासन की इस कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। इस बात की भी काफी चर्चा है कि विवाद के दौरान जब प्रदर्शन में छात्राएं शामिल हो गईं तो प्रॉक्टोरियल बोर्ड में पांच महिला सदस्य होने के बावजूद केवल प्रो. वंदना शर्मा ही मौके पर पहुंचीं।
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प्रो. आलोक ने एबीवीपी कार्यकर्ताओं पर की कार्रवाई की मांग
प्रो. आलोक ने प्राचार्य को पत्र लिखकर एबीवीपी से जुड़े विद्यार्थियों और बाहरी अराजक तत्वों के खिलाफ अनुशासनात्मक एवं कानूनी कार्रवाई की मांग की है। उनका आरोप है कि जब वह प्राचार्य कार्यालय पहुंचे तो वहां मौजूद छात्रों और बाहरी तत्वों ने उनके साथ गाली-गलौज की। धक्का-मुक्की करते हुए उन्हें जान से मारने की धमकी दी। घटना प्राचार्य कार्यालय में लगे सीसी कैमरों में रिकॉर्ड हुई है। कॉलेज प्रशासन से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करते हुए दोषियों की पहचान करने और उनके विरुद्ध सख्त कदम उठाने का अनुरोध किया है।
शिक्षक संघ ने की निंदा
किसी को किसी भी बात या पोस्ट पर आपत्ति है तो कानून, पुलिस सब मौजूद हैं। दस दिन पहले की गई पोस्ट पर अब प्रतिक्रिया किसी साजिश का हिस्सा प्रतीत होती है। विरोध जताने का ये तरीका पूरी तरह गलत है। प्राचार्य कक्ष में आकर एक शिक्षक की गरिमा को ठेस पहुंचाना निंदनीय है। आवश्यकता पड़ी तो शिक्षक के समर्थन में सख्त कदम उठाएंगे। - प्रो. वीपी सिंह, सचिव, बरेली कॉलेज शिक्षक संघ
छात्र संगठनों ने जताया रोष
बरेली कॉलेज छात्रसंघ के महामंत्री डॉ. हृदेश यादव ने कहा कि एबीवीपी कार्यकर्ता कॉलेज परिसर में गुंडई कर अराजकता का माहौल पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। एक शिक्षक के साथ इस तरह का व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। समाजवादी छात्र सभा के महानगर अध्यक्ष विक्रांत सिंह पाल ने कहा कि प्राचार्य कार्यालय में चीफ प्रॉक्टर के साथ की गई अभद्रता गिरते हुए राजनीतिक स्तर का प्रमाण है। उन्होंने जिला प्रशासन और कॉलेज प्रबंधन से दोषियों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है। कहा कि यदि दोषियों को संरक्षण दिया गया या उनके खिलाफ ढिलाई बरती गई तो वह चुप नहीं बैठेंगे। फिलहाल, परिसर का माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है।
एबीवीपी ने सौंपा ज्ञापन
एबीवीपी के प्रतिनिधियों ने प्राचार्य को दिए ज्ञापन में आरोप लगाया है कि एक जिम्मेदार पद पर बैठा व्यक्ति अगर इस तरह की ओछी मानसिकता रखेगा तो संस्थान की गरिमा कैसे बचेगी? उन्होंने यह भी दावा किया कि आलोक खरे पहले भी सोशल मीडिया पर इस तरह की विवादित टिप्पणियां करते रहे हैं और ड्यूटी के दौरान मोबाइल फोन में ही व्यस्त रहते हैं।