बरेली। शारदीय नवरात्र के पहले दिन देवी मंदिरों में भक्तों की सुबह से ही भीड़ लगी रही। घंटे-घड़ियालों की आवाज से आसपास का परिसर गूंज उठा। मंदिर परिसर में भक्तों को सामाजिक दूरी का पालन कराते हुए प्रवेश दिया गया। किसी भी भक्त ने प्रसाद नहीं चढ़ाया। केवल देवी के दर्शन करके ही लौटा दिए गए। महिलाओं ने मंदिरों में छंद भी गाए, जिससे माहौल भक्तिमय हो गया।
शारदीय नवरात्र के पहले दिन श्रद्धालुओं ने कलश स्थापना के बाद ब्रह्ममुहूर्त से ही देवी के दर्शन कर पूजा अर्चना शुरू कर दी, जिससे मंदिर के आसपास का वातावरण घंटे-घड़ियालों और माता के जयकारों से भक्तिमय हो गया। पहले दिन श्रद्धालुओं ने मां शैलपुत्री की पूजा अर्चना कर आरती उतारी।
साहूकारा स्थित नौ देवी मंदिर की गलियां इस बार सन्नाटे में दिखीं। यहां बेहद कम संख्या में भक्तों को मंदिर परिसर में प्रवेश दिया गया। मंदिर परिसर में प्रवेश करने से पहले श्रद्धालुओं के हाथ सामाजिक दूरी का पालन करते हुए सैनिटाइज कराए गए। साथ ही उनका तापमान भी जांचा गया। फूल, प्रसाद न चढ़ने से बाहर फूल, प्रसाद आदि के स्टाल भी खाली रहे। कुछ भक्त घर से प्रसाद लेकर पहुंचे थे, जिसे सेवादारों ने एक ड्रम में रखवा दिया। मंदिर के आसपास की रेलिंग को भी किसी को नहीं छूने दिया गया।
कालीबाड़ी स्थित मां काली का मंदिर आज खोल दिया गया, लेकिन यहां भी भक्तों की भीड़ नहीं जुटने दी गई। भक्त मंदिर के गेट से ही माता के दर्शन करते देखे गए। यहां गेट पर ही पुजारी जी ने माता को प्रसाद आदि चढ़ाया। किसी भी भक्त की चुनरी, नारियल और अन्य चीजें माता को सीधे नहीं चढ़ाई गईं।
नेकपुर स्थित चौरासी घंटा मंदिर में सुबह पांच बजे से ही भक्त उमड़ने लगे थे। मंदिर परिसर में केवल पांच लोगों को ही पूजा करने की अनुमति दी गई थी। इस बार कोरोना संक्रमण की वजह से यहां महिलाओं को छंद भी नहीं गाने दिए गए।
कल्लू डकैत ने मंदिर में चढ़ाया था 84 किलो का घंटा
एनकाउंटर से छह महीने पहले कटरी के कुख्यात डकैत कल्लू ने मन्नत पूरी होने पर चौरासी घंटा मंदिर में 84 किलो का घंटा चढ़ाया था। मंदिर के सर्वाकार रविंद्र मोहन गर्ग ने बताया कि 2005 में कल्लू मंदिर आया था। उसने कहा कि वह एक सप्ताह बाद मंदिर में घंटा चढ़ाने आएगा। उसने किसी को बताने पर अंजाम भुगतने की भी धमकी दी थी। रविंद्र बताते हैं कि कल्लू ने अपना परिचय दिया तो उनके पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई। उन्होंने कल्लू के आने की बात अपने घर में भी नहीं बताई। ठीक एक सप्ताह बाद वह अपने गुर्गों के साथ आया और मंदिर में 84 किलो का घंटा चढ़ाया। इसके छह महीने बाद उसे जीवन के झंझटों से मुक्ति मिल गई।
नौ देवी मंदिर: नवदुर्गा में एक बार दर्शन करने जरूर जाते हैं भक्त
साहूकारा स्थित नौ देवी का मंदिर काफी प्राचीन है। यहां देवी के नौ स्वरूपों की प्रतिमाएं विराजमान हैं। नवरात्र के नौ दिन यहां भक्तों की काफी भीड़ जुटती है। मान्यता है कि यहां मांगी हर मुराद देवी पूरा करती हैं। इन दिनों देवी भक्त माता की पूजा करने अवश्य पहुंचते हैं। महंत योगी किशोर नाथ ने बताया कि दस अक्तूबर 1966 को उनके गुरु योगी काशीनाथ को नवदुर्गा मंदिर की स्थापना का स्वप्न आया था। उसके बाद उन्होंने साहूकारा में एक स्थान पर छप्पर डालकर मां का भजन कीर्तन शुरू कर दिया। धीरे-धीरे यह ख्याति शहर में फैल गई और लोगों ने मंदिर निर्माण के लिए दान देना शुरू कर दिया। तीन मार्च 1968 माघ शुक्ल की बसंत पंचमी के दिन विधिवत अर्चना पूजन करके मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा की गई।