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Bareilly News: मोबाइल टावर लगाने का झांसा देकर करोड़ों ठगे

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बरेली। फर्जी बीएसएनएल अधिकारी बनकर लोगों को मोबाइल टावर लगाने का झांसा दे रहे ठगों का गिरोह बारादरी थाना पुलिस के हत्थे चढ़ गया। पुलिस और एसओजी टीम की संयुक्त कार्रवाई के बाद सीओ तृतीय ने गिरोह व उसके कई जिलों में फैले नेटवर्क का खुलासा किया। छह शातिरों को गिरफ्तार किया गया, जबकि एक आरोपी भाग गया। आरोपी अब तक कई लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी कर चुके हैं।
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बारादरी थाने में सीओ तृतीय पंकज श्रीवास्तव ने बताया कि एसएसपी को सूचना मिली कि कुछ ठग बरेली में फर्जी टावर लगवाने की स्कीम चला रहे हैं। यह लोग जल्द ही सामान समेटकर भागने वाले हैं। सूचना पर एसएसपी ने टीम गठित की। बारादरी थाने की पुलिस व एसओजी की संयुक्त टीम ने बीसलपुर चौराहे के पास दबिश देकर शुक्रवार सुबह छह आरोपियों को हिरासत में ले लिया, जबकि एक आरोपी भाग निकला। आरोपियों के पास से लैपटॉप, टेबलेट, मोबाइल, स्कैनर, फर्जी दस्तावेज, कार और दो बाइक समेत काफी मात्रा में सामान बरामद किया गया। ब्यूरो

ऐसे करते थे ठगी
- सीओ के मुताबिक थाने में एसओजी व पुलिस ने पूछताछ की तो पता लगा कि पकड़े गए आरोपी खुद को बीएसएनएल अफसर बताकर जमीन और छत पर मोबाइल टावर लगवाने का झांसा देकर ठगी करते थे। ये लोग राजेंद्र नगर स्थित मैक्स रिहेब हेल्थ केयर के ऊपर कमरा किराये पर लेकर रह रहे थे। यहां से वह ठगी का पूरा नेटवर्क चलाते थे। आरोपी अलग-अलग सिम कार्ड से लोगों को व्हाट्सएप पर मेसेज भेजते थे। इसमें भारत संचार निगम लिमिटेड का मोबाइल टावर लगाने की फर्जी स्कीम भेजते थे। पंजीकरण व सर्वे के नाम पर यह लोग आवेदक की जरूरत के हिसाब से एक से डेढ़ लाख रुपये तक वसूल लेते थे। इसके बाद उसे फर्जी कागजात थमा देते थे और खुद सिम तोड़कर भाग जाते थे।
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ये आरोपी किए गिरफ्तार
- बारादरी पुलिस ने पीलीभीत के बीसलपुर निवासी इरफान, शाहजहांपुर के कटरा निवासी रजित उर्फ रजत, लखीमपुर खीरी के मजगई निवासी वाजिद, आशिक अली व शाकिर अली, शाहजहांपुर के खुदागंज निवासी फईम को गिरफ्तार कर लिया। जबकि शाहजहांपुर के देवरास निवासी तहसीन मौके से भाग निकला। जगतपुर चौकी प्रभारी सनी चौधरी ने सभी आरोपियों पर थाना बारादरी में रिपोर्ट दर्ज कराई है।
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आरोपी बोले- ठगी ही हमारा रोजगार
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वह लोग खुद को बीएसएनएल का अधिकारी बताकर लोगों को भरोसे में लेते थे। इनमें से कोई अफसर, कोई बाबू तो कोई सर्वेयर बन जाता था। खेत या मकान का सर्वे करने के नाम पर भी ये लोग ठगी करते थे। लोगों को झांसा देते थे कि टावर लगने से उन्हें हर महीने कंपनी से एकमुश्त मोटा किराया मिलेगा।
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