बरेली। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) की साख में फर्जीवाड़े का पेच फंस गया है। दस्तावेजों के मुताबिक, 417 स्वयं सहायता समूहों को 3.87 करोड़ रुपये लोन बांटा गया। इसमें से समूहों पर 2.03 करोड़ रुपये की बकायेदारी है। जिन बैंक शाखाओं पर यह देनदारी दर्शायी गई है, उनके पास न तो संबंधित समूहों के खातों का कोई रिकॉर्ड है, न ही खातेदारों की जानकारी। बड़ौदा यूपी ग्रामीण बैंक की व्योधन खुर्द शाखा में 237 समूहों के खाते दर्शाये गए हैं, जबकि शाखा प्रबंधक इससे इन्कार कर रहे हैं।
मिशन निदेशक की रिपोर्ट के मुताबिक, चमनदुआ कुआं स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) का खाता बैंक ऑफ बड़ौदा की बाराबाजार शाखा में है। इसमें तीन जुलाई 2014 को पांच लाख रुपये का लोन हुआ था। फिलहाल, इसमें 5,00,650 रुपये की बकायेदारी है और खाता एनपीए है। अंजुमदवकुआ एसएचजी के खाते में 29 मार्च 2013 को 4.50 लाख का लोन स्वीकृत हुआ। यह खाता भी नॉन प्रॉफिटेबल एसेट (एनपीए) हो गया है। इसमें 4,45,646 रुपये की बकायेदारी है।
राम सिंह वनवारी लाल समूह को 17 अक्टूबर 2013 को 60 हजार रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ था। इस एनपीए खाते में 1,14,955 रुपये की बकायेदारी है। दैत्यानाद कृषक स्वयं सहायता समूह पिपरिया के खाते में 31 दिसंबर 2016 को दो लाख का लोन हुआ था। यह खाता 1.98 लाख रुपये से एनपीए है। उज्जलाश गोरगांव समूह के खाते में 31 दिसंबर 2016 को लोन हुआ था। यह 2,75,250 रुपये से एनपीए है। कई समूहों के नाम और स्थान भी संदेह पैदा कर रहे हैं। संवाद
जिन एनपीए समूहों के खाते व्योधन खुर्द शाखा में दिखाए जा रहे हैं, उसमें से एक भी खाता हमारी शाखा में नहीं है। यह शाखा ही वर्ष 2014 में खुली है। - निखिल, प्रबंधक, बड़ौदा ग्रामीण बैंक, व्योधन खुर्द
संबंधित बैंकों के शाखा प्रबंधकों को पत्र लिखकर इस बाबत जानकारी लेंगे। ये सभी एनपीए समूह एनआरएलएम के नहीं हैं। जांच हो तो पूरा मामला समझ में आए। - योगेंद्र लाल भारती, उपायुक्त स्वत: रोजगार