पंजाब से दरभंगा जा रही महिला के तीन बैग साथ में ही चल रहे तीन यात्रियों ने चुरा लिए। महिला ने इन तीनों को पहचानते हुए जीआरपी से पकड़वा दिया। दो बैग मिल भी गए और उनमें रखी आठ हजार की नकदी, सामान भी बरामद हो गया। फिर महिला ने पैसा और सामान मिल जाने पर उन्हें माफ करते हुए कोई कार्रवाई न करने की बात कहकर लिखकर दिया। इस पर जीआरपी ने कोई कार्रवाई नहीं की और उन्हें छोड़ दिया।
दरभंगा बिहार के फुल परास के गंगापुर की रहने वाली रेनू पंजाब की मंडी गोविंद में मय परिवार के काम करती है। वह मंगलवार रात शहीद एक्सप्रेस से दरभंगा लौट रही थी। शहीद एक्सप्रेस के जनरल कोच में ही मध्यप्रदेश के राजपुर के बबलू, रमन और राज प्रवेश मय परिवार के सवार थे। ये लोग भी पंजाब में ही मजदूरी करते हैं। तीनों ने रेनू के तीन बैग गायब कर दिए और बरेली जंक्शन पर उतर गए। रेनू ने लखनऊ पहुंचकर जब बैग गायब देखे तो वे वापस बरेली लौटकर आई। यहां तीनों लोग बैठे मिल गए। रेनू ने तीनों को जीआरपी की मदद से पकड़ लिया। तलाशी में दो बैग उनके पास मिल गए, जिनमें रखा सामान और पैसा भी मिल गया। बाद में रेनू का कहना है कि वह भी यात्री है और इसलिए युवकों को वह जेल नहीं भिजवाना चाहती है। उसने लिखकर दिया कि वह कोई कार्रवाई नहीं चाहती। इस पर जीआरपी ने तीनों को छोड़ दिया। जीआरपी के एसएसआई राजेंद्र सिरोही ने बताया कि महिला ने लिखित रूप से कोई कार्रवाई न करने की बात कहते हुए समझौता कर लिया, इसलिए कोई कार्रवाई नहीं की जा सकी।
एक बैग और सोने-चांदी के जेवर नहीं मिले
रेनू का कहना था कि उसके दो बैग और आठ हजार रुपये भी मिल गए, लेकिन सामान का एक बैग उसे नहीं मिला। वह बैग शायद किसी अन्य ने गायब कर दिया। रेनू ने कहा कि जितना सामान मिल गया। यही बहुत है, वरना चोरी गई चीज मिलती ही कहां है।