शेरगढ़ के मवई काजियान गांव के 70 वर्षीय बुजुर्ग अजीज खां की लाश लेकर परिवार के लोग गांववालों के साथ सोमवार दोपहर 11.30 बजे कलक्ट्रेट पहुंचे और हंगामा करने लगे। इन लोगों का आरोप था कि शेरगढ़ पुलिस ने अजीज खां के बेटे और पोते को बेवजह जेल भेज दिया। इस सदमे मेें बुजुर्ग अजीज की मौत हो गई। गांधी जयंती का अवकाश होने के कारण कलक्ट्रेट में न तो भीड़भाड़ थी और न ही अफसर मौजूद थे। सुरक्षा के लिहाज से पुलिस तैनात थी। पुलिस ने ग्रामीणों को समझाकर शांत करने की कोशिश की, लेकिन वे नहीं माने। इस पर पुलिस ने लाठियां फटकार कर भीड़ को खदेड़ दिया और लाश को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराने के बाद शेरगढ़ भिजवा दिया।
उधर, हंगामे से घबराई शेरगढ़ पुलिस ने अजीज के बेेटे और पोते को तुरंत ही रिहा करा दिया। पोस्टमार्टम के बाद पुलिस की चौकसी में शव सुपुर्दे खाक कराया। ग्रामीणों ने बताया कि तीन सितंबर को शेरगढ़ पुलिस ने मवई काजियान निवासी अजीज खां के बेटे कदीर खां और पोते तनवीर खां को शांतिभंग करने के आरोप में जेल भेज दिया था। कदीर और उनके बेटे की नाली के विवाद को लेकर ग्राम प्रधान राहत ने पुलिस से शिकायत की थी। पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर एसडीएम बहेड़ी ने दोेनों को जेल भेज दिया था। रविवार रात अजीज खां की मौत हो गई। घरवालों ने अजीज की मौत के लिए पुलिस को जिम्मेदार ठहराया। कहा, पुलिस ने प्रधान के इशारे पर कदीर खां और उनके बेटे को बेवजह जेल भेज दिया था।
एसओ खुद रिहाई कराकर लाए
अजीज की मौत के बाद कलक्ट्रेट में हुए हंगामे से घबराए शेरगढ़ एसओ उमेश कुमार सोलंकी खुद कदीर और तनवीर की रिहाई कराने के लिए एसडीएम के पास पहुंचे। उन्होेंने एसडीएम को पूरा घटनाक्रम बताया। कहा, परिवार वाले अजीज के अंतिम संस्कार में कदीर और तनवीर को शामिल करने के लिए उनकी रिहाई की मांग कर रहे हैं। एसओ के अनुरोध पर एसडीएम ने पिता-पुत्र को रिहा कर दिया।
दो अक्तूूबर का कार्यक्रम होने की वजह से कलक्ट्रेट का गेट खुला था। इसी का फायदा उठाकर गांव वाले डीसीएम मेें अजीज का शव लेकर कलक्ट्रेट में घुस गए। हमने डीसीएम को वहां से निकालने के बाद शव का पोस्टमार्टम कराया और फिर शेरगढ़ भिजवा दिया। हंगामा करने वाले लोगों को कलक्ट्रेट से निकालने के लिए थोड़ी-बहुत डांट-डपट भी करनी पड़ी।
गीतेश कपिल, प्रभारी निरीक्षक, कोतवाली