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मंडल के पंपों पर पहुंचा रहे ये नकली पेट्रोल

Tue, 28 Feb 2017 01:39 AM IST
बरेली।  
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These imitation petrol pumps are scaled Board - फोटो : बरेली, अमर उजाला
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देवचरा के निकट एक कोल्ड स्टोरेज के अंदर बने टैंकों में नकली पेट्रोल बनाने के धंधे खा खुलासा होने के बाद हड़कंप मचा हुआ है। संकेत मिले हैं कि इस नकली पेट्रोल के खेल में कई बड़े शामिल थे। मंडल भर के पेट्रोल पंपों पर यह नेफ्था, सॉल्वेंट और एथिनॉल से बनाए जाने वाले नकली पेट्रोल पहुंचाया जा रहा था और टैंकरों से सीधे पेट्रोल पंपों के टैंक में उतारा जा रहा था। हैरत यह है कि केमिकल को टैंकरों में गुजरात से लाया जाता है। इतनी दूर से इन पेट्रोलियम पदार्थों को बरेली तक पहुंचा दिया जाता है लेकिन वाणिज्यकर, सेंट्रल एक्साइज और लोकल पुलिस को भनक तक नहीं लगती। उनकी चुप्पी सवालों के घेरे में है। 
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इस नकली तेल के खेल की निष्पक्ष जांच ठीक से हो पाएगी, इसको लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। मौके से मिले सबूतों से स्पष्ट है कि नकली पेट्रोल की सप्लाई बरेली मंडल के बदायूं, शाहजहांपुर, पीलीभीत और बरेली जिलों की पेट्रोल पंपों पर की जाती है। इन पंपों से ही वाहन चालकों को यह तेल उपलब्ध कराया जाता रहा है।
सवाल यह उठता है कि इस तेल को गुजरात से बरेली तक लाने के दौरान किसी भी अधिकारी के स्तर पर चेकिंग नहीं होती है। जबकि जगह-जगह पर यूपी में वाणिज्य कर विभाग की सचल इकाई भी रहती होंगी लेकिन उनको यह टैंकर दिखाई नहीं देते। इनके अलावा सेंट्रल एक्साइज और सीमा पर पुलिस के बेरियरों से भी ये टैंकर आसानी से बरेली आ जाते हैं। इतना ही नहीं, देवचरा के इस कोल्ड स्टोरेज से भी टैंकरों में यह नकली तेल आसानी से पंपों पर कई साल से सप्लाई हो रहा है।
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छह महीने में बोल जाता है इंजन
नकली पेट्रोल के कारण बाइक, कार तथा अन्य वाहनों का इंजन छह महीने में ही बोल जाता है। लोगों को जानकारी नहीं होती थी कि इतना जल्दी उनका इंजन बोर क्यों मांग रहा है। अब नकली पेट्रोल बनाने का खुलासा हुआ तो सब कुछ सामने आने लगा है।
पेट्रोेल के बराबर डेंसिटी के लिए मिलाते हैं केमिकल
पेट्रोल पंपों पर चेकिंग हो और डेंसिटी का परीक्षण किया जाता है तो डेंसिटी सही मिलती थी क्योंकि पेट्रोल के मानक की डेंसिटी के लिए वह दूसरे केमिकलों का इस्तेमाल करते रहे हैं।

45 रुपये का तेल उपभोक्ता को 73 रुपये में
इस केमिकल को 45 रुपये लीटर की दर से खरीदकर 55 रुपये लीटर से नकली पेट्रोल बनाते थे। बाद में उसे पंप पर 73 रुपये प्रति लीटर की दर से बेचा जाता था। इस तरह प्रति लीटर कम से कम 18 रुपये का मुनाफा कमाया जा रहा था।
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