सेंट्रल जेल में बंद रामपुर कांड के आतंकियों, माफिया डान बबलू श्रीवास्तव और उनके साथियों के अलावा अन्य शातिर अपराधियों की कड़ी निगरानी रखने के लिए 21 करोड़ की लागत से जैमर लगाए जाने को मंजूरी मिल गई है। जैमर लगने के बाद जेल में किसी का फोन काम नहीं करेगा। जेल अफसरों को भी बेसिक फोन के सहारे ही रहना होगा।
शासन ने मुजफ्फरनगर, लखनऊ और बरेली समेत प्रदेश आधा दर्जन से ज्यादा जेलों में अदालत के कई बार टिप्पणी करने पर सवा सौ करोड़ रुपये के जैमर लगाने को मंजूरी दी है। जेल में फोन के बात होने की शिकायतें मिलती रहती थीं, इसलिए यह फैसला लिया गया है। मुजफ्फर नगर जेल में जैमर लग चुका है। बरेली जेल में 21 करोड़ के लागत से जैमर लगाया जाना है। जल्द ही इस पर काम होना शुरू होने की उम्मीद है। यहां सीआरपीएफ केंद्र रामपुर कांड के आतंकियों के अलावा माफिया डान बबलू श्रीवास्तव और उनके साथी बंद हैं। इसके अलावा और भी कई शातिर अपराधियों के आने-जाने का सिलसिला लगा रहता है। वरिष्ठ जेल अधीक्षक पीएन पांडेय ने बताया कि जैमर लगने से किसी का फोन जेल परिसर में काम नहीं करेगा।