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तीन मासूमों पर टूट पड़े कुत्ते, युवती को भी काटा

Fri, 24 Feb 2017 01:23 AM IST
बरेली।  
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Swooped on three innocent dog, cut to the girl - फोटो : बरेली, अमर उजाला
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आवारा कुत्तों का आतंक इलाके में एक बार फिर शुरू हो गया है। पहले भोजीपुरा और अब बहेड़ी और देवरनियां में फिर हमले शुरू हो गए हैं। बृहस्पतिवार को आवारा कुत्तों ने हमला कर तीन मासूमों और एक युवती को नोंच डाला। 
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छितौनियां गांव के ज्ञान सिंह के दो साल के पुत्र प्रिंस को आवारा कुत्तों ने शिकार बनाया। शाम करीब तीन बजे वह घर के बाहर खेल रहा था। अचानक चार आवारा कुत्तों का झुंड वहां आ गया और मासूम को घेरकर दोनों पैरों व हाथ में नोंच लिया। प्रिंस के चीखने पर परिवारवाले डंडे लेकर दौडे़ और उसे कुत्तों से बचाया। 
साढे़ तीन बजे इसी गांव की 19 साल की युवती सुषमा पर भी आवारा कुत्तों ने हमला बोल दिया। उसकी जांघ और पैर पर काट लिया। वह घर के बाहर लगे सरकारी नल पर पानी भरने जा रही थी। इसी दौरान करीब आधा दर्जन कुत्तों ने उस पर पीछे से हमला बोलकर जमीन पर गिरा दिया। पास ही पडे़ पत्थर मारकर युवती ने किसी तरह अपनी जान बचाई। 
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इसके बाद चार बजे के करीब बिसनपुर गुलड़िया गांव के संजय कुमार के सात साल के बेटे आदित्य पर भी कुत्तों ने हमला बोल दिया। वह गांव के प्राइमरी स्कूल में दोस्तों के साथ खेलने गया था। इसी दौरान करीब आधा दर्जन आवारा कुत्तों ने उस पर हमला बोल दिया। उसे घेर लिया और नाक और दाएं गाल पर दांत मार दिए। उसके चीखने पर आसपास के खेतों में काम कर रहे ग्रामीण पहुंचे तो कुत्तों ने मासूम को छोड़कर ग्रामीणों पर हमला बोल दिया। ग्रामीणों ने बड़ी मुश्किल से कुत्तों को खदेड़ा। ।

राहगीरों ने बड़ी मुश्किल से बचाया
देवरनियां। बृहस्पतिवार दोपहर दो बजे क्षेत्र के एक गांव की स्कूली छात्रा पर स्कूल से घर लौटते समय आवारा कुत्तों ने हमला बोल दिया। राहगीरों ने उसकी चीख सुनकर कुत्तों को भगा दिया। 
देवरनियां थाना क्षेत्र के गांव मोहनपुर निवासी जफर खां की नौ वर्षीय पुत्री जैनव बी पास के ही कनमन गांव के शरत चंद्र मांटेसरी पब्लिक स्कूल में कक्षा तीन में पढ़ती है। बृहस्पतिवार दोपहर दो बजे स्कूल से पढ़कर घर लौट रही थी। रास्ते में मोहनपुर व कनमन गांव के बीच मोहनपुर ढाल से करीब सौ मीटर आगे अचानक आवारा कुत्तों के झुंड ने उस पर हमला बोल दिया। हमले में उसके कपड़े भी फट गए। छात्रा के बाएं पैर में कुत्तों ने तीन जगह नोच लिया। राहगीरों ने उसे बचाकर पिता जफर खां को सूचना दी। मौके पर पहुंचे जफर बेटी को इलाज के लिए बहेड़ी के सरकारी अस्पताल ले गए।

खुले में मांस फेंके जाने पर लगे प्रतिबंध
मांस के अवशेष खुले में फेंके जा रहे हैं। घरों में चल रहे अवैध स्लाटर हाउस इसकी सबसे बड़ी वजह हैं। इन्हीं अवशेषों को खाकर कुत्ते हिंसक हो रहे हैं। इसके बावजूद प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। ग्रामीणों ने एलान किया है कि प्रशासन नहीं चेता तो आवारा कुत्ते ये अवशेष खाकर और हिंसक हो जाएंगे। वहीं, दूसरी ओर मानवाधिकार एसोसिएशन के रीतेंद्र सिंह, ललित पिपलानी, अमित अग्रवाल डब्बू भईया, ठाकुर मनोज सिंह ने इस बाबत प्रशासन से सख्त कदम उठाने की मांग की है। 

मांस के अवशेष खाकर आवारा कुत्ते हिंसक हो चुके हैं। इन अवशेषों को जमीन में दफन करना चाहिए। कुत्तों की नसबंदी भी बेहद जरूरी है। -डॉ. रेखा पाठक, वैज्ञानिक, आईवीआरआई
खूंखार कुत्तों का खौफ बरकरार
भोजीपुरा। खूंखार कुत्तों का खौफ ग्रामीणों और बच्चों में बृहस्पतिवार को भी साफ दिखा। हालांकि, कोई अफसर इनका दर्द जानने नहीं पहुंचा। 43 बच्चों में से आठ ही स्कूल पहुंचे पर अभिभावकों के साथ। तीन घंटे पढ़ने के बाद इंटर कॉलेज के बड़े बच्चों के साथ घर गए। लोगों का मानना है कि धौराटांडा में चल रहे अवैध स्लाटर हाउस का कचरा खाकर ये कुत्ते आदमखोर हो गए हैं। हालांकि, मंगलवार और बुधवार को ग्रामीणों ने दो आदमखोर कुत्तों को मार दिया था। जाफरपुर के प्रधान हरचरन लाल ने बताया कि कुत्तों का झुंड जंगल में दनियां नदी के आस पास मंडराता रहता है। इधर, पटेल मांटेसरी स्कूल मियांपुर के प्रधानाचार्य ओमकार मौर्य ने बताया कि खतोला, जाफरपुर के 43 बच्चों में से बृहस्पतिवार को सिर्फ 8 ही पहुंचे। 

आवारा कुत्तों के हमले की जांच को बनीं दो कमेटी 
 बरेली। जिलाधिकारी सुरेंद्र सिंह ने बहेड़ी तहसील के अलावा भोजीपुरा एरिया में हाल ही मेें आवारा कुत्तों के हमले की जांच के लिए दो कमेटियां गठित की हैं। पहली जांच कमेटी में एसडीएम बहेड़ी, उप प्रभागीय वनाधिकारी बरेली और उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी और दूसरी जांच कमेटी मेें एसडीएम सदर, उप प्रभागीय वनाधिकारी आंवला और उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी को नामित किया गया है। दोनों कमेटियां इस बात की जांच करेगी कि बरेली, भोजीपुरा और बहेड़ी में बच्चों को आवारा कुत्ते ही काटते हैं या फिर कोई अन्य जानवर। डीएम के अनुसार दोनों जांच कमेटियों के सदस्य आवारा कुत्तों की बहुलता वाले गांवों में जाकर ग्रामीणों से हमलों के बारे में जानकारी लेंगे। जिन बच्चों को कुत्तों ने काटा है, उन परिवारों से भी मिलेंगे। जिन इलाकों में आवारा कुत्ते के हमलों से घटनाएं बढ़ी हैं, वहां ऐसे जानवरों की औसतन संख्या कितनी है। ऐसी घटनाओं को भविष्य में रोकने के लिए क्या किया जा सकता है। जिलाधिकारी ने बताया कि इसकी कार्ययोजना बनाकर नगरपालिका या नगर पंचायतों की मदद से आवारा कुत्तों पर अंकुश लगाने के उपाय किए जाएंगे। 
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