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वर्चस्व की जंग में सुलग रहा सरायतल्फी, फिर चली गोली

Sun, 19 Jun 2016 12:32 AM IST
ब्ययूराो, अमर उजाला बरेली।
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सराय तल्फी वर्चस्व की जंग में सुलग रहा है। यहां प्रधान और पूर्व प्रधान की आपसी रंजिश में आए दिन होने वाली फायरिंग गांव वालों पर भारी पड़ रही है। दो दिन में तीसरी बार हुई गोलीबारी में दोनों गुटों के छह लोग घायल हो चुके हैं। पूरे गांव में दहशत का माहौल है। शनिवार को पूरा इलाका फिर गोलियों की तड़तड़ाहट से गूंज उठा। दो पक्षों की गोलीबारी और चाकू से हुए हमले में एक युवक गंभीर रूप से जख्मी हो गया। सूचना पर पहुंची पांच थानों की पुलिस ने हमलावरों को पकड़ने के लिए कांबिंग की लेकिन किसी की भी गिरफ्तारी नहीं हो सकी। 
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सीबीगंज के गांव सराय तल्फी में शनिवार को प्रधानी के चुनाव की रंजिश और अवैध खनन को लेकर प्रधान और पूर्व प्रधान के बची वर्चस्व की जंग चल रही है। दो दिन के अंदर दोनों गुटों में तीसरी बार फायरिंग हो चुकी है। शनिवार को गांव के मेवाराम का 38 वर्षीय बेटा भगवानदास किला में दूध बेचने गया था। वहां पूर्व प्रधान के गुट ने उस पर हमला कर दिया। भगवानदास का कहना है कि उसे कई लोगों ने उसे घेर लिया और पैर में गोली मार दी। वह जान बचाने के लिए भागा तो हमलावरों ने उस पर चाकू से वार किए। आसपास के लोग बचाने आए तो हमलावर हवा में फायरिंग करते हुए भाग गए। सूचना पर पहुंची पुलिस ने घायल युवक को जिला अस्पताल में भर्ती कराया। पुलिस हमलावरों की तलाश में जुटी। पांच थानों की पुलिस ने सरायतल्फी से रामगंगा पुल तक खेतों में कांबिंग भी की लेकिन हमलावरों का सुराग नहीं लग सका।   
इससे पहले शुक्रवार को सुबह प्रधान के बेटे अक्षत ने अपने समर्थकों के साथ घर में घुसकर पूर्व प्रधान गुट के बृजेश, अन्ने, अनीता को घायल कर दिया था। इसके बाद पूर्व प्रधान गुट ने फायरिंग की। इसमें पिंटू और सुनीता घायल हुए थे। शनिवार को हमले में घायल भगवानदास सुनीता का भाई है।  
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दोनों गुटों में बरसों पुरानी है रंजिश 
पूर्व प्रधान रामपाल और प्रधान का बेटा अक्षत के बीच काफी पुरानी रंजिश है। रेत के अवैध खनन के लिए में वसूली के लिए दोनों यादव गुट गांव में अपना वर्चस्व कायम रखना चाहते हैं। यही लड़ाई की मुख्य वजह है। बृहस्पतिवार को बृजेश के चाचा को अक्षत गुट ने पीट दिया था। शुक्रवार को बृजेश और अन्ने को गोली मारी गई। फिर रामपाल गुट ने अक्षत के साथी पिंटू और सुनीता को छर्रे लगे। इसके बाद भगवानदास को गोली और चाकू से मारकर घायल कर दिया गया। 
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