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घर में जिंदा जल गए छह बच्चे

Sat, 30 Apr 2016 01:28 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
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अाग से तबाह घर
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किला छावनी की नई बस्ती में शुक्रवार को सुबह पांच बजे मोमबत्ती से घर में लगी आग में रिक्शा चालक  के छह बच्चे जिंदा जल गए। परिवार का मंझला बेटा काम पर जाते समय बहन को मोमबत्ती बुझाने की हिदायत देकर गया था। बहन ने कमरा तो बंद कर लिया लेकिन मोमबत्ती बुझाना भूल गई। संभवत: इसी मोमबत्ती से आग लगी  छत की लकड़ियां गिरने से खपरैल बच्चों के ऊपर आ गिरी बाहर के कमरे में तो छत की जगह पालिथीन रखी थी जिसने जल्दी ही आग पकड़ ली। आग में घिरे बच्चे दरवाजा भी नहीं खोल पाए और सभी की दर्दनाक मौत हो गई।
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घटना के वक्त परिवार के बड़े सदस्य पीलीभीत एक शादी समारोह में गए हुए थे। लपटें देखकर जुटे मुहल्ले वालों ने बाल्टियों से पानी डालकर किसी तरह आग पर काबू पाया लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। फायर ब्रिगेड तो सूचना के दो घंटे बाद तब पहुंची जब कुछ भी करने को नहीं बचा था। किला छावनी मुहल्ले की नई बस्ती में 60 गज के खपरैल और पन्नी से बने छोटे से घर में राजू कश्यप और उसके दामाद गुड्डू कश्यप का परिवार रहता है। राजू अपनी पत्नी रजनी, बडे़ बेटे सागर और उसके परिवार के साथ ही दामाद गुड्डू और बड़ी बेटी सोनी बृहस्पतिवार की दोपहर ही पीलीभीत एक रिश्तेदार के घर शादी समारोह में चले गए थे। घर में राजू का बेटा कल्लू उर्फ संगम और (18), चार बेटियां सलोनी (17), संजना (12), सानिया (11), दुर्गा (7), नातिन महिमा (8) और नाती देव (7) रह गए। कल्लू बर्फ का काम करता है। काम पर जाने के लिए वह शुक्रवार को तड़के तीन बजे उठा। बिजली न होने से मोमबत्ती जलाकर तैयार हुआ। सलोनी ने उसे चाय बनाकर दी और उसके जाते ही फिर सो गई। सलोनी ने कमरा तो बंद कर लिया लेकिन मोमबत्ती घर के अंदर जलती रही। यही भूल परिवार पर भारी पड़ गई। मोमबत्ती से लगी आग ने कुछ ही देर में विकराल रूप धारण कर लिया। राजू के घर के आसपास भी सिर्फ एक घर है। इसी वजह से मुहल्ले वालों को भी आग की लपटें तत्काल नहीं दिखीं। कुछ देर बाद पड़ोसियों ने घर के अंदर आग की लपटें देखीं तो बाल्टियों से पानी लाकर आग बुझाई। आग काबू में आने के बाद अंदर पहुंचे तो वहां छह बच्चों की लाशें पड़ी थीं। दर्दनाक मंजर देखकर मुहल्ले वालों की चीखें निकल गईं। फायर ब्रिगेड को 5.43 बजे सूचना दी गई। फिर भी वह 7.40 बजे मुहल्ले में पहुंच पाए और संकरी गली होने की वजह से दमकल गाड़ी घटनास्थल तक गए बिना ही लौट आई। किला पुलिस ने बच्चों के शवों को बाहर निकलवाकर पोस्टमार्टम कराया।

पीड़ित परिवारों को दो-दो लाख
पीड़ित परिवारों को मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से दो-दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। जिलाधिकारी गौरव दयाल ने यह एलान किया। एडीएम सिटी आलोक कुमार और एसडीएम सदर मनीष नाहर ने दोपहर 11 बजे घटनास्थल पर जाकर स्थिति का जायजा लिया।  
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आग की खबर का सीन 
सीन एक- नई बस्ती स्थित काली मंदिर के निकट 60 गज का लंबा मकान दो हिस्सों में बंटा है। पीछे वाले हिस्से में जला सामान, चारपाई, बिस्तर, फ्रिज और बच्चों के शव खपरैल के नीचे दबे पड़े थे। दूसरे हिस्से में टीवी का केवल डिश अंटीना, चार कबूतर और दो मुर्गियां ही बची थीं। बाकी सारा सामान जलकर राख हो चुका था। 
सीन दो- घर के चारो ओर की दीवारें काली पड़ चुकी हैं। ऊपर की खपरैली और पॉलीथिन का कवर समेत बच्चों की किताबें, तख्त, कूलर और बर्तन आदि सामान भी अंदर के हिस्से में जले हुए बिखरे पड़े थे। अलमारी में कुछ कपड़े बच गए थे। खाने पीने का सामान भी जलकर राख हो चुका था। 

सबको हिला गईं दो माओं की वेदनाएं 
बरेली। पोस्टमार्टम हाउस पर दो मांओं की वेदना किसी को भी हिला देने वाली थी। आपस में मां-बेटी रजनी और सोनी कभी एक दूसरे को ढांढस बंधाती, तो कभी कहती कि अच्छा होता जो शादी में न जाते। मौके पर रो रही रजनी की बहू शोभा दोनों को गले लगाकर सांत्वना देती। घटना इतनी दर्दनाक थी कि राजू के घर के आस-पड़ोस की महिलाएं भी पोस्टमार्टम हाउस चलीं आईं। संगम के चेहरे पर पूरे समय पछतावा दिखा कि काश खुद ही मोमबत्ती बुझाकर काम पर चला गया होता। राजू पूरे समय रोते हुए कहते रहे कि हमारी पूरी दुनिया ही उजड़ गई। मुआवजे की घोषणा हुई तो फूट पड़े, कहने लगे कि यह रुपए क्या बच्चों को वापस ला पाएगा। राजू के दामाद गुड्डी पूरे समय कहते रहे हम सबने कितनी मेहनत करके बच्चों को बड़ा किया है, हमारा भगवान ही जानता है। किससे शिकायत करें, बोले- भगवान का शुक्र है कि डेढ़ साल का बच्चा समर उनके साथ ही था। भाई समर बताने लगा कि छह साल पहले बहनोई गुड्डू और पिता राजू ने मिलकर साठ गज जमीन खरीदी तब खपरैल डालकर बड़ी मेहनत से मकान बना पाएं। 

छावनी में तब्दील हो गया पोस्टमार्टम हाउस 
एक तरफ पोस्टमार्टम हाउस पर गम में डूबा परिवार अपने बच्चों के शवों के पोस्टमार्टम होने का इंतजार कर रहा था। इस दौरान किसी भी प्रकार के हंगामे की आशंका से पुलिस प्रशासन अलर्ट मौजूद रहा। महिलाओं की सुरक्षा के लिए महिला थाना की एसओ समेत महिला पुलिस फोर्स, किला थाना पुलिस, एसपी सिटी, सीओ सिटी, कोतवाली इंस्पेक्टर, सुभाषनगर थाना इंस्पेक्टर समेत अन्य पुलिस फोर्स मौजूद रही। इस दौरान शहर विधायक डॉ. अरुण कुमार, पूर्व सांसद प्रवीण सिंंह ऐरन, बसपा से इंजीनियर अनीस खां पहुंचे। 

चार किलोमीटर दूर,दो घंटे बाद पहुंची दमकल
- संकरी गलियों की वजह से घर तक फिर भी नहीं पहुंच सकी 
- 5.43 बजे सूचना मिली, दमकल टीम पहुंची 7.40 पर
- राजू ने कहा दूसरे रास्ते से पहुंच सकती थी फायर ब्रिगेड
फायर ब्रिगेड की टीम को नई बस्ती में राजू के घर पहुंचने में दो घंटे का वक्त लग गया। फायर ब्रिगेड को आग लगने की चना सुबह 5.43 बजे मिली, पर दमकल टीम राजू के घर पहुंची 7.40 बजे।  टीम ने इलाके की लोकेशन समझने की भी कोशिश नहीं की। पहले साजो सामान जुटाते रहे बाद में बड़ी गाड़ी लेकर किला पुल के पार पहुंच गए।  भारी भरकम गाड़ी संकरी गलियों में नहीं जा पाई तो फिर छोटी गाड़ी मंगवाई गई। इस काम में दो घंटे का वक्त लग गया।  मोहल्ले वाले तब तक बाल्टियों से आग बुझा चुके थे। अगर किसी घनी बस्ती में आग लगी होती तोे हजारों घर जलकर राख हो जाते।  
नई बस्ती की फायर ब्रिगेड से दूरी बमुश्किल चार किलोमीटर होगी। फायर ब्रिगेड की गाड़ी किला से शंकर मिष्ठान भंडार वाली गली से होकर नई बस्ती पहुंचने की कोशिश में लगी रही। पुलिस के पहुंचने के बाद फायर टीम पैदल ही घर तक पहुंची। तब तक आग बुझ चुकी थी और दमकल टीम उल्टे पांव वापस लौट आई। 

 कंट्रोल रूम का नंबर अरसे से खराब 
फायर स्टेशन का जनता में प्रचलित 101 नंबर तो लंबे समय से खराब है। कंट्रोल रूम से नया नंबर 945441-8503 जारी किया गया है। ये नंबर पब्लिक में ज्यादा प्रचलन में नहीं है।  101 नंबर को ठीक कराने के लिए बीएसएनएल को कई बार पत्र भी लिख चुका है। 

‘नई बस्ती में आग लगने की घटना 3.30 बजे की थी। फायर के कंट्रोल रूम में सूचना 5.43 पर मिली। बड़ी गाड़ी संकरी गली में फंस गई। फिर छोटी गाड़ी भेजी, वह भी नहीं निकल पाई। जब तक हम पहुंचे, तब तक आग बुझ चुकी थी।’ राधेश्याम सिंह, एफएसओ, फायर ब्रिगेड 

 काफी देर बाद पहुंचे अफसर 
प्रशासनिक और पुलिस के अफसर आग लगने की घटना के काफी देर बाद तक पीड़ित परिवार के घर पहुंचे। एसएसपी आरके भारद्वाज, एसपी सिटी समीर सौरभ, सीओ सिटी सिद्धार्थ वर्मा, थाना और चौकी प्रभारी किला काफी देर बाद मौके पर पहुंचे।   शहर विधायक डा. अरुण कुमार पीड़ित परिवार को लेकर खुद कलक्ट्रेट में डीएम से मिलने पहुंचे। सुबह 11 बजे के बाद एडीएम सिटी आलोक कुमार और एसडीएम सदर मनीष नाहर पीड़ित परिवार के घर पहुंचे। 
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