सेंट्रल जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे शातिर अपराधी बड़कऊ उर्फ राजकुमार को असली मकसद तो बहराइच जेल में शिफ्ट होना है। वह जिस जेल में जाता है, वहां कुछ न कुछ खुराफात कर देता है। शनिवार को सेंट्रल जेल के जेलर एके सागर की तहरीर पर थाना इज्जतनगर में बहराइच के डीएम, कैबिनेट मंत्री यासर शाह, डॉ. केडिया अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक से रंगदारी न देने पर बम से उड़ा देने के आरोप में मुकदमा दर्ज कर तफ्तीश शुरू कर दी है।
बहराइच के थाना विशेश्वरगंज के रामलौटनपुरवा गांव के रहने वाले शातिर अपराधी बड़कऊ उर्फ राजकुमार की धमकी से जेल प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है। वरिष्ठ जेल अधीक्षक ने बैरक नंबर-4 में बंद बड़कऊ की तलाशी कराई तो उसके पास से बहराइच के डीएम, कैबिनेट मंत्री और डॉक्टर केडिया अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक के नाम लिखे धमकी भरे पत्र मिले हैं। इन पत्रों के डीएम और सीएमओ से दो-दो लाख रु पये और कैबिनेट मंत्री से पांच लाख रुपये की रंगदारी मांगी गई है। तीनों ही पत्रों में बड़कऊ ने रंगदारी न देने पर बम से उड़ा देने की धमकी दी है। शनिवार को इज्जतनगर पुलिस ने मामले में जेलर की तरफ से मुकदमा दर्ज कर लिया है। इससे पहले शुक्रवार को बड़कऊ के खिलाफ गोंडा के एडीजे सप्तम से 20 लाख रुपए की सेंट्रल जेल के डॉ. नेमचंद को न पहुंचाने पर उनकी कोर्ट और दीवानी कचहरी को उड़ा देने की धमकी देने के आरोप में मुकदमा लिख चुका है। धमकी के पत्र भेजने के लिए बड़कऊ मुलाकात और पेशी पर बैरकों से निकलने वाले कैदियों को इस्तेमाल करता है। आनाकानी करने पर वह जेल में ही धमका देता है।
...तो मेरा खर्चा कैसे चलेगा
विवेचक एसएसआई आरके सक्सेना ने बताया कि बड़कऊ के खिलाफ मुकदमा लिखने के बाद वह उसके बयान दर्ज करने के लिए सेंट्रल जेल गए थे। उन्होंने धमकी भरे पत्रों के बारे में उन्होंने उससे पूछा तो कहने लगा खर्चे के लिए मेरे पास रुपया कहां से आएगा। सजा भी इन्हीं लोगों ने सुनाई है तो खर्चे को रुपये कौन देगा।
कोट
बड़कऊ का असली मकसद बहराइच जेल में शिफ्ट होना लग रहा है इसलिए वह इससे पहले भी कई जेलों में खुराफात करता रहा है। सेंट्रल जेल से इसीलिए वह लोगों धमकी भरे पत्र लिख रहा है। जेलर की तरफ से आरोपी के खिलाफ मुकदमा लिखकर विवेचना कराई जा रही है। इस मुकदमे में भी आरोपी को बी-वारंट पर तलब कराकर कोर्ट में पेश कराया जाएगा।
- आशुतोष कुमार, डीआईजी
बड़कऊ से दोस्ती में बंदी रक्षक सस्पेंड
तीन बंदी रक्षकों के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश
बरेली।
बड़कऊ उर्फ राजकुमार की सेंट्रल जेल में भी दबंगई चलती है। उसने कई बंदी रक्षकों से इस तरह की दोस्ती कर रखी है कि वह उनके इशारे पर काम करते हैं। सेंट्रल जेल के वरिष्ठ जेल अधीक्षक प्रेमनाथ पांडेय ने बड़कऊ उर्फ राजकुमार से दोस्ती के आरोप में बंदी रक्षक राघव राम शुक्ला को निलंबित कर दिया है। बाकी तीन बंदी रक्षकों के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए हैं। चारों बंदी रक्षकों के खिलाफ जिला जेल के अधीक्षक दधिराम मौर्य जांच करेंगे।
बड़कऊ पर हत्या समेत सात मुकदमे दर्ज हैं। जेल सूत्रों के मुताबिक बंदी रक्षक राघव राम शुक्ला की बड़कऊ की बैरक में ड्यूटी लगवाने के लिए उतावले रहते थे। बताया जाता है कि बड़कऊ को बंदी रक्षक चुपचाप कई सुविधाएं दिला देते थे। इनके अलावा तीन और ऐसे बंदी भी जेल प्रशासन ने चिहिन्त किए हैं, जिनका बड़कऊ के पास ज्यादा आना-जाना रहता था। बंदी रक्षकों के बड़कऊ के पास पहुंचते ही बाकी बंदी किनारे हो जाते थे। जेल प्रशासन ने बड़कऊ के करीबी कैदियों को चिहिन्त करके उन पर भी शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। यह पता लगाया जा रहा है कि पेशी पर जाते समय किस-किस बंदी से बड़कऊ की मुलाकात हुई है।
बनियान पर ही पत्र लिख दिया
बड़कऊ बहराइच, लखीमपुर और पीलीभीत जेलों में खुराफात करने के बाद 2015 में आया था। उसे जिस जेल में शिफ्ट किया गया, वहीं उसने बवाल कर दिया। जेल अधिकारियों की शिकायतें करनी शुरू कर दीं। बरेली सेंट्रल जेल में उसे पत्र लिखने के लिए कागज नहीं मिला तो उसने अपनी बनियान फाड़कर उसी पर शिकायती पत्र लिख दिया था। जेल के अधिकारियों का कहना है कि बड़कऊ के व्यवहार को लेकर उसके साथ रहने वाले बंदी भी शिकायत करते रहते हैं। वह किसी से सीधी बात नहीं करता है।