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ग्रमीणों की कहानी से पुलिस कठघरे में

Sun, 15 Feb 2015 01:28 AM IST
बरेली
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सर्राफ के पिता मास्टर द्वारिकाप्रसाद की मानें तो गुस्साए ग्रामीण लुटेरे जफर को पीट रहे थे। उन्होंने उनको समझाकर जफर को छुड़ाया। उनके भी कई हाथ लग गए। कुछ ग्रामीणों के साथ वे उसे घर की ओर ले आए। जफर ने बताया कि वह लुटेरा नहीं है। चाचा इमरान उसे बुला लाया। बोला कि उसे छोड़ दें तो माल वापस दिला देगा। एक ग्रामीण के मोबाइल से जफर ने एक नंबर मिलवाया। दूसरी तरफ शायद इमरान था। जफर ने मुसीबत में होना बताते हुए कहा कि माल दे दो। उन लोगों से भी बात कराई। लुटेरे माल वापसी को तैयार हो गए। शर्त थी कि जफर को छोड़ दो। इसी बीच कोतवाल जेएल यादव पुलिस लेकर आ गए। उन्होंने कोतवाल से चुपके से कहा कि माल देने लुटेरे आएं तो पकड़ लें, पर कोतवाल न माने। कहा कि अभी लुटेरे को ले जाने दो, तुम्हारा माल दिलवा देंगे। सैकड़ों ग्रामीणों की मौजूदगी में रात पौने नौ बजे करीब कोतवाल अपनी गाड़ी से जफर को ठीक हालत में ले गए। ग्यारह बजे करीब वे लोग रिपोर्ट लिखाने गए। रात साढ़े बारह बजे तक उन्हें जफर की कोई जानकारी नहीं थी। फिर पुलिस थाने से उन्हें अस्पताल ले गई जहां जफर की हालत गंभीर बनी थी। द्वारिकाप्रसाद ने शक जताया कि थर्ड डिग्री से जफर की मौत हुई होगी। ग्रामीणों को बेवजह फंसाया तो सुप्रीमकोर्ट तक जाएंगे।

जफर का मोबाइल, पेन कार्ड मिले
वारदात के वक्त लुटेरे जफर का मोबाइल, आधार और पेन कार्ड मौके पर गिर गए थे। कुछ ग्रामीण इन्हें ले गए। शनिवार को उन्होंने यह सामान द्वारिकाप्रसाद को दे दिया। उन्होंने बताया कि वे यह सामान पुलिस को दे देंगे। जाहिर है कि पुलिस अगर इमरान, जफर आदि के नंबर ट्रेस करती तो अब तक लुटेरे पकड़ में होते।
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सीओ की बात
 हमने जफर को ग्रामीणों से छुड़ाया था। ग्रामीणों को समझाया कि यह मर गया तो तुम फंस जाओगे। फिर ग्रामीणों के साथ ही उसे इलाज को भेज दिया। पुलिस जफर को कहीं नहीं ले गई। हमें तो दूसरे दिन निजी अस्पताल में उसका शव मिला।- नरेश कुमार, सीओ नवाबगंज
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