फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पुष्पेंद्र को अफजाल बनाकर भेज दिया जेल

Thu, 23 Jun 2016 01:56 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
विज्ञापन
विज्ञापन
भुता थाने की पुुलिस और पशु तस्करों का गठजोड़ इतना तगड़ा है कि उन्होंने पशु तस्कर अफजाल को जेल जाने से बचाने के लिए उसके स्थान पर  पुष्पेंद्र नाम के एक युवक को को गौकशी के मामले मे जेल भेज दिया। पुष्पेंद्र स्मैक का आदी है। उसका कहना है कि  जेल भेजने से पहले उसे थाने में स्मैक पिलाई और कहा कि छोटे से अपराध में जेल भेज रहे हैं, कुछ दिनों के बाद छुड़ा लेंगे। तीन महीने तक तक तो वह जेल से छूटने का इंतजार करता रहा। इधर पुलिस ने 30 मार्च को इस मामले में चार्जशीट लगा दी। जब उसे ये बात पता चली तो उसने 18 जून को जेल अधीक्षक के माध्यम से अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट  को पत्र भेजकर न्याय दिलाने की गुहार लगाई है। पुष्पेंद्र की कहानी की जेल अधीक्षक ददीह राम मौर्य भी पुष्टि कर रहे हैं उन्होंने बताया कि 16 जून एसीजेएम सामान्य निरीक्षण पर जेल आए थे तो बंदी ने तब भी उनके सामने अपना पक्ष रखा था।
विज्ञापन

थाना सुभाषनगर के महेशपुर ठाकुरान निवासी पुष्पेद्र सिंह ने एसीजेएम के न्यायालय के लिए भेेजे प्रार्थनापत्र में कहा है कि 18 मार्च को दो व्यक्ति गाड़ी चलवाने के बहाने से उसे भुता ले गए और वहां के थाने की हवालात में बंद करा दिया। उस समय पुलिस ने तलाशी में उसका पर्स, डायरी और पर्स में 275 रुपये, दो फोटो, जरूरी कागजात तथा ड्राइविंग लाइसेंस ले लिया। वहां मौजूद पशु तस्करों और पुलिस ने उससे कहा कि उसे वे जेल तो जरूर जरूर भेज रहे हैं लेकिन उसका चालान छोटे से केस में कर रहे हैं। बाद में उसे जेल से छुड़ाने में भी पूरी मदद करेंगे। स्मैक के नशे का आदी होने के कारण थाने में ही उसे स्मैक पिलाई। अगले दिन 19 मार्च को कोर्ट में पेश करने से पहले थाने में चाय पिलाई, कुछ देर बाद वह गुमसुम हो गया था। उसी दिन जेल पहुंचते ही तबियत खराब हो गई तो वहां के अस्पताल में भर्ती करा दिया। करीब दस दिन तक जेल के अस्पताल में इलाज चला और उसके बाद बैरक में भेज दिया।
पुष्पेंद्र का कहना है कि जेल में उसने अन्य कैदियों को सेटेलाइट बस अड्डे से लेकर जेल आने तक का घटनाक्रम बताया। यह भी बताया कि उसका नाम अफजाल नहीं है। इस पर कैदियों ने उसे यह कहकर डरा दिया कि किसी को सच बताया तो धोखाधड़ी का मामला और लग जाएगा। पुष्पेंद्र का कहना है कि उसका कोई पैरोकार नहीं था, इसलिए वह डर गया। घर में उसकी बूढ़ी मां है और वह खुद गंभीर  बीमारी से ग्रसित है। जेल में बंद होने से लेकर 18 जून तक कोई उससे मुलाकात तक करने नहीं आया है। जेल में वह एक जोड़ी कपड़े में रहते हुए झाडू लगा रहा है। उसने कहा है कि 28 मई को गवाही में आए दरोगा गौरव मिश्रा ने उसे 100 रुपये दिए, तब जाकर उसे तेल, साबुन, पेन और कागज नसीब हुआ।
विज्ञापन


ये है तस्कर अफजाल
मार्च के महीने में भुता कस्बे में लोगों की सूचना पर मारुति वैन में गौमांस पकड़ा गया था। उस समय पुलिस की मिलीभगत से थाना बीसलपुर के ग्यासपुर निवासी अफजाल पुत्र भूरे खां फरार दो अन्य साथियों के साथ फरार हो गया था। यह मूलत: पीलीभीत जिले का रहने वाला है लेकिन इस समय बरेली के थाना प्रेमनगर के राजेंद्र नगर इलाके में रहा है।  इस पर कई और मुकदमे दर्ज हैं।
‘धारा 3-5-8 क अपराध संख्या 7-16 में 30 मार्च को चार्जशीट लगाई जा चुकी है। यह घटनाक्रम मेरे समय का नहीं है, उन दिनों दूसरे एसओ थे। अफजाल के नाम से गिरफ्तारी सब इंस्पेक्टर रोशन सिंह ने की है जो रिटायर हो चुके हैं।’ गौरव सिंह यादव जांच अधिकारी
‘बंदी अफजाल उर्फ पुष्पेंद्र  सिंह की ओर से एसीजेएम के लिए प्रार्थनापत्र जेल प्रशासन को मिला है जिसे संबंधित अदालत में उचित कार्रवाई के लिए भेज दिया है।’
विज्ञापन

ददीह राम मौर्य, अधीक्षक जिला कारागार

 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें