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पंजाब ही नहीं, बरेली भी उड़ रहा है

Sat, 25 Jun 2016 02:04 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
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पंजाब में मजबूत सिख कौम को तबाह करने पर तुले ड्रग तस्करों पर बनी ‘उड़ता पंजाब’फिल्म की देश में चर्चा में है। इस मामले में अपना बरेली भी मिनी पंजाब ही है। हफ्ता -महीना वसूली सिस्टम से चल रहे थानों की कमाई का ये सबसे बड़ा जरिया है। कमाऊ थानों से बड़े अफसर खुश हैं इसलिए नशे पर अंकुश लगाने की कोई रणनीति बनाते ही नहीं। वे इसलिए भी कुछ नहीं कर रहे कि सारा माल तो नेताओं के झंडे लगी गाडियों में आ-जा रहा है और नशेबाजों की उनसे सीधी डील है। वरना तस्करों के हाथों एक दरोगा की मौत पर कुछ तो हरकत होती। 
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दिल्ली की टीमें बरेली से तस्करों को उठा ले जाती हैं लेकिन किसी जिम्मेदार को शर्म नहीं आती। एक से करोड़ों की स्मैक मिल रही है। खुलासा हो रहा है कि दिल्ली में बनी पिस्टलों के बदले बरेली से स्मैक जा रही है। उत्तराखंड की छात्राएं तक यहां माल लेने के लिए कैरियर की तरह इस्तेमाल हो रही हैं। एक नहीं कई बार अड्डे चिह्नित हो चुके लेकिन धंधे में इतना माल है कि इसके खिलाफ कोई रणनीति नहीं बनती। 
बरेली शहर के अलावा फतेहगंज पूर्वी, फरीदपुर, फतेहगंज पश्चिमी और मीरगंज में स्मैक, चरस और अफीम का धंधा खुले आम चल रहा है।  बच्चे भी नशे के आदी होकर अपना भविष्य बर्बाद हो रहे हैं। लोगों से बातचीत करने पर एक बात साफ हो जाती है धंधेबाजों को स्थानीय पुलिस का भी पूरा संरक्षण है। शहर में गंगापुर चौराहे पर मठिया वाली गली की स्मैक खुलेआम बिकती है। यहां लोग राखी उर्फ मैकिया का नाम लेते हैं जो 120 रुपये देकर चुटकी भर स्मैक दे देती है। सैलानी में लोगों ने सलीम का नाम लिया। इनके अलावा जाटवपुरा, सुभाषनगर, बदायूं रोड, नकटिया पर भी खोखों और ठेलों पर स्मैक की पुड़िया बिकती हैं। रामगंगा पुल के निकट गोताखोर पंखिये स्मैक बेचते हैं। फतेहगंज पश्चिमी में अंसारी मोहल्ला भी स्मैक, चरस, अफीम के धंधे के लिए जाना जाता है। एक स्मैकिये के मुताबिक यहां थोक में 12 सौ से 16 सौ रुपये प्रति ग्राम स्मैक मिलती है। सस्ते रेट वाला माल अच्छा नहीं होता। फरीदपुर में पिछले साल एसटीएफ ने स्मैक, चरस और अफीम का बड़ा कारोबार करने वाले सपा अल्पसंख्यक सभा के नगर अध्यक्ष अजीमुल्ला को पकड़ा था। स्थानीय पुलिस को खबर नहीं दी गई वरना उसे पकड़ना मुस्किल होता। अजीमुल्ला से बड़ी मात्रा में नशीले पदार्थ पकड़े गए थे। वह जेल में है लेकिन उसका धंधा आस-पास के इलाकों में अभी भी चल रहा है। 
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नेपाल से पंजाब तक होती है तस्करी
बरेली में हाइवे के ढाबों से स्मैक, चरस, अफीम हीरोइन समेत अन्य नशीले पदार्थों की तस्करी  पीलीभीत, शाहजहांपुर, लखीमपुर खीरी, बहराइच, ही नहीं नेपाल और  दिल्ली और पंजाब तक जाती है। तस्कर बिहार और झारखंड से कच्चा माल लाते हैं।  फतेहगंज पूर्वी में एक ढाबे  की मालकिन नशीले पदार्थों की तस्करी में जेल भी जा चुकी हैं। 
नशे के धंधे के गढ़
शहर- गंगापुर, सैलानी, जाटवपुरा, सूफी टोला, सुभाषनगर, नकटिया, पुराना शहर के इलाके, बड़ा बाईपास पर अहिलादपुर, रजऊ परसपुर, फरीदपुर में कानून गोयान मोहल्ला, बहेरा, मोहनपुर, बीसलपुर रोड की कालोनियां, शिवपुरी रंधौली, अठान गांवों समेत शाहजहांपुर की तिलहर, जलालाबाद तहसील और बदायूं की दातागंज तहसील। 
‘पुलिस नशे के कारोबार करने वाली जगहों पर समय-समय पर छापेमारी करती है। जहां ये कारोबार चल रहे हैं, वहां फिर से रेड डलवाकर तस्करों को जेल भेजा जाएगा।’ आरके भारद्वाज, एसएसपी बरेली।
1- सूफी टोला में मानसिक चिकित्सालय की दीवार से लगी गली में 12.30 बजे बैसाखी बाबा दो साथियों शकील और यासीन स्मैक  ले भरी बीड़ी का दम भर रहे हैं। शकील बड़बड़ा रहा था- सबका रिक्शा मिलिगै। हमैं तो कछू मिलैइया नाय। नशा नाय करैं तो का करैं। 
2- फरीदपुर के भूरा गांव का रहने वाला 18 साल का मुन्ना खुर्रम गौंटिया में सड़क के किनारे दोपहर की तगड़ी धूप में एक बजे स्मैक पी रहा था। बोला- अब्बू पीते थे तो हम भी पीने लगे। स्मैक पीने के लिए ये रोज बरेली आना पड़ता है। कारचोबी में 350 रुपये रोज कमाते है। इसमें 240 की स्मैक पी जाते हैं। 
3- अपराह्न 1.30 बजे गंगापुर चौराहे पर पीपल के पेड़ के नीचे स्मैकियों का जमावड़ा लगा था। बाकी स्मैकिये स्मैक पी रहे थे। नन्हें तंबाकू मलते हुए बाकी से एक या दो बार दम लगवाने के लिए गिड़गिड़ा रहा था। बोला-  सिर पैर दर्द कर रहे हैं। आप खरीदो तो एक पुड़िया हमें भी दे देना। 
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