पुलिस विभाग के बाबू भी अजब खेल कर रहे हैं। विभाग में तैनात जिस कांस्टेबल चालक का जनवरी में रिटायरमेंट हो जाना चाहिए था। पेंशन बाबू ने उसे रिटायर ही नहीं किया। आर्म्स पुलिस के कांस्टेबल का लेखाजोखा रखने वाले चरित्र पंजिका बाबू (सीआरके) उनके भी उस्ताद निकले। उन्होंने प्रमोशन की सूची में चालक का नाम भेज दिया। पुलिस मुख्यालय ने चालक को रिटायरमेंट की अवधि में ही हेड कांस्टेबल चालक के पद पर प्रमोशन भी कर दिया। जांच में दोनों बाबुओं के दोषी पाए जाने पर एसएसपी ने 33 दिन का फालतू वेतन उनके वेतन से काटे जाने की सजा सुना दी।
कांस्टेबल चालक नेमपाल को 31 जनवरी 2016 को रिटायर होना था। कायदे से छह महीने पहले पेंशन बाबू मुकेश राणा को उन्हें नोटिस देना चाहिए था, लेकिन उन्होंने इसकी जरूरत ही नहीं समझी। इसके अलावा समय पूरा होने के बाद भी पेंशन बाबू ने उन्हें रिटायर नहीं किया।
आर्म्स पुलिस के कांस्टेबल का लेखा जोखा रखने वाले सीआरके गन्नू सिंह ने मार्च माह में एसएसपी को पत्र लिखकर कहा कि पेंशन बाबू के सूची बदल देने की वजह से कांस्टेबल चालक का प्रमोशन सूची में नाम चला गया। इस बीच 29 फरवरी को कांस्टेबल चालक का हेड कांस्टेबल चालक के पद पर प्रमोशन भी हो गया। उसे गैरकानूनी तरीके से 33 दिन का अतिरिक्त वेतन मिल गया है। मामले की जांच करा ली जाए। एसएसपी आरके भारद्वाज ने पूरे प्रकरण की जांच कराई तो पेंशन बाबू और सीआरके दोनों ही दोषी पाए गए। एसएसपी ने पेंशन बाबू की वेतन से 60 फीसदी और सीआरके के वेतन से 40 फीसदी एक्स्ट्रा वेतन की वसूली करने के आदेश दिए हैं। इसके अलावा दोनों बाबुओं की सर्विस बुक में प्रतिकूल प्रवृष्टि भी अंकित की जा रही है।