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सिंडीकेट बैंक का मार्केटिंग अफसर गिरफ्तार

Sun, 10 Apr 2016 12:54 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/संभल
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फर्जीवाड़ा
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मुंबई में तैनात रहे सिंडीकेट बैंक के मार्केटिंग अफसर को आंध्र प्रदेश की पुलिस ने संभल जिले के नखासा थाना क्षेत्र से गिरफ्तार किया है। उसके खिलाफ आंध्र प्र्रदेश में फर्जीवाड़े का मुकदमा दर्ज है। नौकरी के लिए हुई परीक्षा में किसी और को बैठा कर खुद ज्वाइन किया था। पुलिस उसे रविवार को न्यायालय के समक्ष पेश करेगी।
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मोहम्मदपुर भंडा निवासी योगेश पुत्र युद्धवीर ने आंध्र प्रदेश में सिंडीकेट की नौकरी के लिए वर्ष 2014 में आवेदन किया था लेकिन जब नौकरी के लिए परीक्षा हुई तो उनके स्थान पर कोई और बैठा था। इसके लिए बाकायदा साल्वर 5 लाख रुपये तय हुए थे।

पुलिस के बताए पर यकीन करें तो चार लाख का भुगतान हो गया था और एक लाख रुपये रह गए थे। योगेश मुंबई में मार्केटिंग अफसर के पद पर नौकरी करने लगा था। इस दौरान उससे कई बार तगादा किया जा रहा था लेकिन वह टाल रहा था। इस पर किसी की ओर से बैंक के मुख्य कार्यालय को शिकायत की गई।
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शिकायत के आधार पर जांच हुई तो आंध्र प्रदेश की साइबर सेल को पता लगा कि परीक्षा के दौरान योगेश के स्थान पर कोई और बैठा था। साल्वर के माध्यम से परीक्षा के दौरान फर्जीवाड़ा किया गया था और उसके आधार पर चयन हुआ था।

मामला बैंक ने आंध्र प्रदेश की पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस ने साल्वर गैंग को ट्रैक कर रही है। जांच पड़ताल के दौरान ही संभल जिले के मोहम्मदपुर भंडा निवासी योगेश को गिरफ्तार किया है।

पता यह लगा है कि फर्जीवाड़ा करके नौकरी दिलाने वालों के गैंग में संभल जिले के आदमपुर गांव दो और लोग शामिल हैं जिनके माध्यम से योगेश, मुन्ना भाईयों के गैंग के संपर्क में आया था। पुलिस अब उन्हें भी तलाश रही है। नखासा के थाना प्रभारी इंद्रेश सिंह चाहर ने गिरफ्तारी की पुष्टि की और कहा कि आरोपी को आंघ्र प्रदेश की पुलिस रविवार को अदालत में पेश करेगी।      

बैंक में नौकरी पाने केनाम पर फर्जीवाड़ा करने के आरोप में पकडे़ गए युवक के साथ थाने में मेहमानों जैसा व्यवहार हुआ। वह थाने में लाया गया तो मोबाइल से बात करने की पूरी छूट दी गई। उसके हाव भाव देख कर ऐसा लग रहा था जैसे पकड़े जाने के बाद उसे कानून का कोई भय नहीं है। थाने में वह रहा और इस दौरान अपने मोबाइल फोन बातें करता रहा।

वह शनिवार को शाम थाने में बड़े ठाठ से घूम रहा था जबकि इस दौरान आंध्र प्रदेश और स्थानीय पुलिस भी थाने में मौजूद थी पर किसी ने उसे रोका और टोका नहीं। इस बारे में पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का पक्ष लेने का प्रयास किया गया लेकिन बीएसएनएल के संचार सेवाएं ठप होने की वजह से बातचीत नहीं हो सकी।
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