किसान के परिवार को भाजपा सरकार बनने के बाद किसानों के ऋण माफी की घोषणा से उम्मीद बंधी थी। घर का सब कुछ बिकने के बाद अवसाद में चल रहे निरंजन को सांत्वना दी जा रही थी कि सरकार की योजना में ऋण माफी का आवेदन कर दिया जाए। किसान के बड़े बेटे चमन ने बताया कि उसके पिता आवेदन के लिये तैयार भी हो गए थे, लेकिन ऋण के दबाव के साथ चिटफंड कंपनी की ठगी ने उन्हें तोड़ दिया।
निरंजन ने बेटी की शादी के लिये बैंक और ग्रामीणों से करीब एक लाख 80 हजार का ऋण लिया था। तयशुदा समय में ऋण चुकाने के लिये निरंजन ने एक प्राइवेट चिटफंड कंपनियों में एक लाख 20 हजार निवेश किया था। निरंजन ने सोचा था कि चिट फंड कंपनी से मिलने वाले रुपये से बैंक का ऋण चुका देेगा, लेकिन चिटफंड कंपनी ठगी करके भाग गईं। यह मामला पुलिस में भी पहुंचा था। गांव के लोगों का रुपया चुकता करने का दबाव बढ़ता जा रहा था इसलिए पत्नी रूपा के जेवर सहित घर का सामान बेच दिया था। माली हालत खराब होने के चलते किसान क्रेेडिट कार्ड पर लिये एक लाख के ऋण की एक भी किस्त जमा नहीं हो सकी थी। बैंक से मिली जानकारी के अनुसार करीब 3645.76 रुपया का ब्याज भी जुड़ गया था। बैंक का दबाव चल रहा था। हालांकि बैंक प्रबंधन के अनुसार किसान को कोई नोटिस जारी नहीं हुआ था।
दो बार हुई निरंजन के साथ ठगी
निरंजन ने गांव के काशीराम के कहने पर बीती 7 जून 2011 को केबीसीएल इंडिया लिमिटेड की एक फाइनेंस कंपनी की 25-25 हजार की दो एफडी खरीदी थीं। जिसकी रकम 7 दिसंबर 2016 को मिलनी थी। दोगुनी होकर 50-50 हजार का भुगतान होना था। चमन ने बताया कि काशीराम ने बताया कि कंपनी भाग चुकी है। जिससे रुपया डूब गया। इसके अलावा शहर के एक परिचित वहीद ने भी चार साल पहले पीएसीएल नाम की निजी फाइनेंस कंपनी से बीमा करवाया था। जिसमें निरंजन ने 70 हजार जमा किये थे। यह कंपनी भी फर्जीवाड़ा करके भाग गई।
किस्त नहीं जमा करने पर चढ़ा ब्याज
बरेली। युनाइटेड बैंक के शाखा प्रबंधक टीके दत्ता ने बताया कि निरंजन सिंह ने तीन मार्च 2016 को किसान क्रेडिट कार्ड बनवाकर एक लाख का ऋण लिया था। ऋण खाता में एक भी किस्त जमा नहीं की थी। उन्होंने बताया कि ऋण की वसूली के लिये बैंक से कोई नोटिस नहीं भेजा गया था। किसान ने भी बैंक से संपर्क नहीं किया था। किसान क्रेडिट कार्ड की अवधि तीन साल होती है। इस अवधि में किसान कभी भी ऋण चुकता कर सकता है। इस अवधि में किसान को कोई नोटिस नहीं भेजा जाता है। अगर छह महीने तक किसान किस्त जमा कर दे तो उसे ब्याज से छूट मिलती है। तीन साल पूरे होने के बाद ही खाता बंद करने की कार्रवाई के बाद नोटिस भेजा जाता है।
जमीन बेचना चाहता था निरंजन
बेटी की शादी के लिये निरंजन ने गांव के यशपाल से 50 हजार और वीरेंद्र से 30 हजार का रुपया लिया था। ऋण चुकाने के लिये उसने फसल बेचकर यशपाल का 50 हजार का ऋण चुका दिया था। किसान अब बारह बीघे जमीन को बेचने का विचार कर रहा था।
तहसीलदार सौंपेंगे अपनी रिपोर्ट
गांव में तहसीलदार मलखान सिंह ने मौका मुआयना करने के बाद बताया कि दैवी आपदा होने पर सरकारी मदद की गुंजाइश थी, लेकिन अब मुख्यमंत्री सहायता कोष से मृतक के परिवार की मदद हो सकेगी। वह अपनी रिपोर्ट पुलिस की जांच रिपोर्ट के आधार पर तैयार करके प्रशासन को सौंपेंगे।
कर्ज कैसे चुका पाउंगा
निरंजन चार भाइयों में तीसरे नंबर पर था। उसके बड़े भाई जसवंत ने बताया कि वह अक्सर कहता था कि इतना रुपया कैसे चुका पाऊंगा। उसे सभी मिलकर समझाते थे कि सबकी मदद से रुपया चुका दिया जाएगा। भाई महेश चंद और छोटेलाल ने बताया कि तीन बहनों की शादी के बाद सभी भाइयों की माली हालत खराब हुई थी। जिसके बाद निरंजन को चिटफंड कंपनी की ठगी से भी काफी धक्का लगा।
नहीं पहुंचे हाल लेने नेता
निरंजन के बेटे चमन ने बताया कि उम्मीद थी कि सरकार बनने के बाद उनकी ऋण माफी के लिये प्रयास होंगे। टीवी पर घोषणाएं सुनीं भी, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। पिता की मौत के बाद कोई नेता मिलने तक नहीं पहुंचा।