मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में गरीब लड़कियों की शादी और विधवाओं के पुनर्विवाह में दिए जाने वाले दहेज के सामान की खरीद में भी कमीशनबाजी के रास्ते खुले हुए हैं। इस योजना के नोडल समाज कल्याण विभाग को स्थानीय निकाय के अधिकारियों और बीडीओ को इस आयोजन के लिए धनराशि देनी है। शादी करने वाले जोड़ों को देने के लिए दहेज की खरीद सीधे इन्हीं अफसरों को करनी है। दहेज में दिए जाने वाले सामान के लिए जिला स्तर पर बनी समिति ने केवल आइटम और उनके अनुमानित रेट ही तय किए हैं। ऐसे में इस सामान की खरीद में कोई हेराफेरी होती है तो इसे पकड़ पाना मुमकिन नहीं है। इसमें पेच यह भी है कि धनराशि के खर्च का ऑडिट भी समाज कल्याण को नहीं करना है। इसलिए अफसर भी बेखौफ है।
इस योजना में प्रत्येक जोड़े की शादी पर 35 हजार खर्च होने हैं। इस तरह पिछले और इस साल को मिलाकर 1998 जोड़ों की शादियां कराने के लिए 4.26 करोड़ रुपये से खर्च होने हैं। इस आयोजन की जिम्मेदारी शहर में स्थानीय निकाय के अधिकारियों और गांवों में बीडीओ को दी गई है। शादी के लिए चिह्नित जोड़ों के लिए दहेज के सामान की खरीद भी जिला स्तर पर न होकर सीधे इन्हीं अधिकारियों को ही करनी है। इसके लिए शादी करने वाली विधवा के लिए पांच हजार और कुंवारी लड़कियों के लिए दस हजार रुपये की धनराशि तय की गई है। हालांकि जिला स्तरीय क्रय समिति ने आइटम और उनके रेट तय किए हैं। जैसे, लेडीज सूट के 1000, ब्राइडल साड़ी के 1300, मेकअप बॉक्स के 700, स्टील अलमारी के 3500, बिछुए पर पीस के 1200 और स्टील के बर्तनों के 700 रुपये तय है। इसी तरह दहेज के लिए तय 12 आइटम के रेट इसी तरह निर्धारित किए गए हैं। इसमें दिक्कत यह है कि अगर कमीशनबाजी के चक्कर में अगर हल्के सामान की खरीद ज्यादा रेट में होती है तो इस रेट लिस्ट के हिसाब से उसको पकड़ पाना संभव नहीं है।
पिछली बार सामूहिक विवाह में जोड़ों के परिवारों ने गद्दा, साड़ी, बिछुओं को बताया था हल्का
इसी जनवरी में जिला मुख्यालय सहित कई जगहों पर प्रशासन ने सामूहिक विवाह के कार्यक्रम कराए थे। यहां अर्बन हाट में हुए कार्यक्रम में जोड़ों को चारपाई, गद्दे, साड़ी, बिछुआ सहित दहेज के तौर पर कई आइटम दिए गए थे। इसमें वर-वधू के परिवार वालों ने दहेज में मिले सामान का काफी हल्का बताते हुए नाखुशी जाहिर की थी। यही हाल दूसरी जगहों पर हुए कार्यक्रमों में भी रहा। अधिकारियों का कहना है कि दहेज के लिए निर्धारित राशि काफी कम है। इसलिए बहुत बेहतर सामान देना मुमकिन नहीं है।
पांच हजार रुपये खाने पर भी होना है खर्च
सामूहिक विवाह में आने वाले प्रत्येक जोड़े के परिवार वालों को खाना खिलाने पर भी पांच हजार रुपये खर्च होना है। पिछली बार प्रशासन ने सभी जोड़ों के लिए खाने की संयुक्त व्यवस्था कराने के बजाय प्रत्येक जोड़े के परिवार वालों के लिए पूड़ी, सब्जी के पैकेट दे दिए थे।
वर्जन
जोड़ों को दहेज देने के लिए सामान की खरीद नगर निगम के अधिकारी और बीडीओ को करनी है। समाज कल्याण विभाग का काम केवल बजट देना है। इस धनराशि का ऑडिट भी संबंधित विभागों को ही करना है। - अशोक दीक्षित, समाज कल्याण अधिकारी