रेलवे वर्कशाप में एक और हादसा
इज्जतनगर स्थित रेलवे वर्कशॉप में क्रेन के केबिन में सीढ़ी से चढ़ते समय क्रेन ड्राइवर बंदर की घुड़की से घबराकर गिर गया। नीचे गिरे क्रेन ड्राइवर के सीने में लोहे का एंगल घुस गया और वह गंभीर रूप से घायल हो गया। पहले उसे रेलवे अस्पताल और फिर एसआरएमएस ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई। इस दुर्घटना से रेलवे कर्मचारियों में रोष व्याप्त है।
शहर के सिकलापुर निवासी 55 वर्षीय सुरेश चंद्र शर्मा पूर्वोत्तर रेलवे के वर्कशॉप में क्रेन ड्राइवर पद पर कार्यरत थे। उनकी तैनाती 15 नवंबर 1982 में पिता भोलानाथ की मृत्यु के बाद मृतक आश्रित पद पर हुई थी। उनकी ड्यूटी सोमवार सुबह छह बजे से वर्कशॉप में थी। वह सुबह 7.55 बजे क्रेन के केबिन में पहुंचने के लिए सीढ़ी से चढ़ रहे थे। वह केबिन तक पहुंचे ही थे कि क्रेन में लगे बर्रों का छत्ता छिड़ गया। इसके साथ ही आए बंदर ने उन्हें घुड़की दी तो सुरेश का सीढ़ी से हाथ छूट गया और वह नीचे आ गिरे। साथी प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, नीचे लगा लोहे का एंगल सुरेश के सीने में घुस गया। इससे वर्कशॉप में खलबली मच गई। काफी संख्या में कर्मचारी मौके पर जमा हो गए। घायल सुरेश चंद्र को आनन फानन में रेलवे अस्पताल लाया गया, जहां से उसे एसआरएमएस रेफर कर दिया गया। दोपहर तीन बजे वहां उसने दम तोड़ दिया। रेलवे अधिकारी भी अस्पताल पहुंच गए और यहां मौजूद उनके परिवार को अधिकारियों ने ढांढस बंधाया। साथ ही कर्मचारी कल्याण निधि से दस हजार रुपये नगद सहायता राशि प्रदान की और सुरेश चंद्र के बेटे अमित शर्मा को मृतक आश्रित पद पर नियुक्ति के लिए कार्रवाई शुरू कर दी गई।
जांच को तीन सदस्यीय कमेटी गठित
हादसे की जांच को चीफ वर्कशॉप मैनेजर एसी बसेरा ने तीन सदस्यीय कमेटी गठित की है। कमेटी में वर्कशॉप मैनेजर मन्नू राम, सहायक इंजीनियर बीपी सिंह, असिस्टेंट वर्कशॉप मैनेजर को शामिल किया गया है। कमेटी को सभी पहलुओं पर जांच कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं।
क्रेन ड्राइवर सुरेश चंद्र सीढ़ी से फिसलकर गिर गया और निजी अस्पताल में उसकी मौत हो गई। उसके बेटे को अनुकंपा नियुक्ति के लिए पांच मई को परीक्षा में बैठाया जाएगा। उसकी योग्यता के आधार पर उसकी नियुक्ति की जाएगी। साथ ही हादसे की जांच कराई जा रही है।
- अरविंद श्रीवास्तव, मंडल कार्मिक अधिकारी
ड्यूटी स्थल से हटाकर काम कराया जा रहा था सुरेश से
बरेली। वर्कशॉप में मौजूद साथी कर्मचारियों के मुताबिक, सुरेश चंद्र शर्मा की ड्यूटी कैरिज लिफ्टिंग शॉप में सुबह छह से शाम छह बजे तक लगी थी। इसके बावजूद उससे यहां काम न कराकर ब्राडगेज बोगी की तरफ भेज दिया गया। यहां पर काफी दिनों से क्रेन खड़ी थी। इसकी केबिन में बर्रों का छत्ता लगा था और बंदर भी इधर मंडराते हैं। इस क्रेन को चलवाने के लिए सुरेश को भेजा गया। सुरेश सीढ़ी से केबिन में जाने को चढ़ रहे थे। दो सीढ़ी ही बची थी कि अचानक बर्रें छिड़ गईं और इसी दौरान आए बंदर ने घुड़की दी तो सुरेश का हाथ सीढ़ी के डंडे से छूट गया और वह नीचे आ गिरे। नीचे लगा लोहे का एंगल उनके सीने में घुस गया। जिससे उनकी मौत हो गई। साथ ही कर्मचारियों और कर्मचारी नेताओं का कहना है कि अगर सुरेश से उसके ड्यूटी स्थल पर काम कराया जाता तो शायद उसकी जान बच जाती।
पहले भी कई कर्मचारियों की जा चुकी है जान
बरेली। वर्कशॉप में हादसे पर हादसे हो रहे हैं, लेकिन रेलवे प्रशासन इन्हें रोकने को कोई कदम नहीं उठा रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि वर्कशॉप में बंदरों का आतंक है। साथ ही साफ सफाई ठीक न होने से कई जगह बर्रों के छत्ते भी लग लगे हैं। जिससे कर्मचारियों को जान गंवानी पड़ रही है। 26 सितंबर 2016 को प्रवर खल्लासी सबाई सिंह मीना की भी बंदर की घुड़की से पेड़ से गिरकर मौत हो गई थी। इससे पहले एक महिला की जलकर मौत हुई थी और उससे पहले नन्हें नाम के कर्मचारी पर क्रेन का हुक टूटकर गिर गया था, जिससे उनकी मौत हो गई थी। कर्मचारी नेताओं का आरोप है कि वर्कशॉप में रेलवे प्रशासन की लापरवाही से लगातार हादसे बढ़ रहे हैं।