शाही की कमला देवी की हत्या उनकी बहू सुशीला ने ही अपने प्रेमी और भाई सहित पांच लोगों की मदद से की थी। सुशीला का मकसद कमला देवी से उनके बेटे यानी अपने पति हरीश के दुर्घटना बीमा क्लेम के चार लाख रुपये हासिल करना था। बहू कमला देवी को घर से लोन कराने के बहाने सिविल लाइंस की स्टेट बैंक शाखा तक लेकर आई और फिर एक अधिकारी से मुलाकात कराने का झांसा देकर पीडब्लूडी कॉलोनी के खंडहर हो चुके शौचालय तक ले गई। वहां सुशीला का भाई प्रेम सिंह निवासी धनतिया मीरगंज, प्रेमी पालू उर्फ प्रमोद निवासी गांव अकसौरा, किशन लाल और पूर्व प्रेमी प्रेमशंकर पहले से मौजूद थे। बकौल पुलिस, सुशीला दरवाजे पर खड़ी हो गई, जबकि पालू और प्रेमशंकर ने कमला देवी के शॉल से उनका गला घोंट दिया। वह छटपटाईं तो किशन लाल और प्रेम सिंह ने उनके हाथ-पांव पकड़ लिए। प्रेमशंकर के पिता शाही थाने में होमगार्ड हैं। हत्या करने के बाद लाश को शौचालय में डालकर सभी अपने घर लौट गए। कोतवाली में प्रेसवार्ता में एसपी सिटी रोहित सिंह ने कमला देवी हत्याकांड का खुलासा किया।
ढूंढ़ने का करती रही ड्रामा
सुशीला ने अपनी सास की न केवल गुमशुदगी दर्ज करा दी बल्कि खुद भी उन्हें ढूंढने का ड्रामा करती रही। कमला देवी के छोटे बेटे भूपराम ने शक के आधार पर जब अपनी भाभी के खिलाफ पुलिस को तहरीर सौंपी तो सुशीला ने उसके खिलाफ शाही थाने में दुष्कर्म का मामला दर्ज करा दिया। बाद में इस शर्त पर समझौता कर लिया कि वह कमला देवी के लापता होने के मामले में पैरवी नहीं करेगा।
बड़े बेटे को नौकरी और छोटे बेटे को मिली थी जमीन
दरअसल, कमला देवी के पति गंगाराम उर्फ ननुकी की मौत के बाद उनकी जगह पीडब्लूडी में बेलदार की नौकरी को लेकर घर में विवाद हुआ तो कमला देवी ने इस तरह इसका निपटारा किया। उन्होंने नौकरी बड़े बेटे हरीश को दिला दी और आठ बीघा जमीन छोटे बेटे भूपराम को दे दी। नौकरी मिलने के तीन साल बाद ही हरीश की मौत हो गई। उसकी लाश भोजीपुरा में रेलवे लाइन पर पड़ी मिली थी। हरीश के बाद नौकरी उनकी पत्नी सुशीला को मिल गई। इसके बाद सुशीला ने देवर भूपराम को मिली जमीन में से छह बीघा बिकवा दी और उस पैसे से शाहदाना में प्लाट खरीदवा दिया।
बीमा क्लेम बना था फसाद की जड़
असल विवाद तब शुरू हुआ जब कमला देवी ने अपने बेटे हरीश की मौत के बाद रेलवे के खिलाफ मुआवजा का क्लेम किया। सुशीला को एहसास हुआ कि बीमा क्लेम की चार लाख की रकम उनकी सास को मिलेगी। उसने सास पर दबाव बनाया, लेकिन वह नहीं मानीं। इसके बाद सुशीला ने गाजियाबाद स्थित कार्यालय में बीमा की राशि का क्लेम किया और खुद को नॉमिनी बताया। इसी बीच सुशीला ने अपनी सास को रास्ते से हटाने का प्लान बना लिया।
हरीश की मौत की दुबारा जांच शुरू
पुलिस को शक है कि हरीश की भी नौकरी हासिल करने के उद्देश्य से हत्या की गई थी। घटना को हादसे की शक्ल देने के लिए बाद में उसकी लाश को रेलवे ट्रैक पर फेंका गया। पुलिस अब कमला देवी हत्याकांड को डबल मर्डर के तौर पर देखते हुए जांच कर रही है।
रुपये और जेवर लूट लिए
भूपराम ने पुलिस को बताया कि 21 मार्च, 2017 को कमला देवी बहू सुशीला के साथ पेंशन निकालने घर से निकली थीं। उन्होेंने सिविल लाइंस स्थित स्टेट बैंक की मुख्य ब्रांच से 1500 रुपये निकाले थे। कमला देवी की हत्या करने के बाद सुशीला ने यह रुपये और उनके जेवर लूट लिए थे।
सुशीला के गिरफ्तारी होते ही बाकी आरोपी फरार
पुलिस ने सुशीला की गिरफ्तारी के बाद प्रेम सिंह, पालू उर्फ प्रमोद, किशन लाल और प्रेमशंकर के घरों पर दबिश दी, लेकिन सभी गायब मिले। सीओ प्रथम कुलदीप कुमार ने दावा किया कि जल्द ही सभी आरोपियों को पकड़ लिया जाएगा।