एमबीबीएस में दाखिला कराने के नाम पर 42 लाख रुपये की ठगी करने के आरोपी विश्वजीत-डे झारखंड की राजधानी रांची की जेल में हैं। उसने वहां एक आईपीएस अफसर को भी लाखों रुपये का चूना लगाया है। सोमवार को ठगी की शिकार छात्रा के चाचा ने डीआईजी को अपना दुखड़ा सुनाया तो उन्होंने बाकी तीन आरोपियों की गिरफ्तारी के आदेश दिए।
कैंट के नकटिया की रहने वाली रबिया सैफी का एमबीबीएस में दाखिला कराने के लिए उसके मौसेरे भाई जुबैर आलम से शशि बिहार कॉलोनी चाशवर होम रोड रांची (झारखंड) के विश्वजीत-डे ने 42 लाख रुपये की ठगी कर ली थी। दिल्ली में पढ़ाई कर रहे जुबैर को ही दोस्तों अलीगढ़ के न्यू सर सैयद नगर रोड के सहरोज, रामघाट रोड के विकास शर्मा और मुजफ्फरनगर के आराफात खान ने जाल में फंसाकर विश्वजीत से मुलाकात कराई थी। अराफात खान दिल्ली में रहकर विश्वजीत-डे के लिए काम करता था। जुबैर ने मौसेरी बहन के दाखिले के लिए विश्वजीत-डे से बात की तो उसने बताया कि वह वीवीआईपी सीट पर दाखिला कराएगा। जुबैर ने पिता अब्दुल रसीद से कहकर प्लाट बिकवाया और 42 लाख रुपये विश्वजीत-डे को दे दिए, लेकिन इसके बाद भी दाखिला नहीं हुआ। जुबैर और उसके चाचा डॉक्टर इक्तेदार हुसैन ने विश्वजीत-डे से संपर्क करने की कोशिश की तो वह बात करने को राजी नहीं हुआ। उसके साथियों ने भी जुबैर का फोन उठाना बंद कर दिया। 2 दिसंबर 2014 को जुबैर की तहरीर पर चारों के खिलाफ कैंट थाने में मुकदमा लिखा गया। सोमवार को डॉक्टर इक्तेदार हुसैन ने डीआईजी से इस मामले की शिकायत की। उन्होंने बताया कि वह विश्वजीत-डे की तलाश में रांची गए थे। वहां के बढ़ियातू थाने से जानकारी मिली कि विश्वजीत-डे ने झारखंड के एक आईपीएस अफसर से भी एमबीबीएस में दाखिले के नाम पर ठगी की है। आईपीएस से ठगी करने के आरोप में वह इन दिनों रांची की जेल में हैं। डीआईजी ने तीनों ठगों की गिरफ्तारी करने के आदेश दिए हैं।
सफदरजंग हास्पिटल में दाखिले के नाम पर की थी ठगी
राबिया का सगा भाई मोहम्मद सलीम सुल्तान सऊदी अरब में सीए है। उसकी बड़ी बहन बीएचएमएस करके दिल्ली में अस्पताल चला रही हैं। छोटी बहन भी मेडिकल की तैयारी कर रही है। विश्वजीत-डे ने सफदरजंग अस्पताल में एमबीबीएस में दाखिला कराने का आश्वासन मिलने के बाद राबिया भी बेहद खुश थी। उसे दाखिला तो मिला ही नहीं ढाई साल में पुलिस इंसाफ भी नहीं दिला पाई है।
छह विवेचक बदल गए, हुआ कुछ नहीं
इस मामले की विवेचना सबसे पहले नकटिया चौकी इंचार्ज जेपी यादव को मिली थी। इसके बाद कृष्ण कुमार शर्मा को दी गई, लेकिन कुछ नहीं हो पाया। छह महीने पहले एसएसपी ने यह विवेचना क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर कर दी। यहां सबसे पहले शिवराज सिंह, इसके बाद सोनकर बाबू फिर जेपी यादव और अब घनश्याम तिवारी इस मामले विवेचना कर रहे हैं।
झारखंड से बी-वारंट पर विश्वजीत-डे को बरेली लाने के लिए कोशिश की जाएगी। इसके अलावा उसके अन्य साथियों को भी पकड़ने की कोशिश की जा रही है।
-घनश्याम तिवारी, विवेचक