जिनको व्यवस्था बनानी है वे ही वसूली में लगे हैं। मंगलवार को अमर उजाला में सैटेलाइट जाम और अतिक्रमण की खबर प्रकाशित हुई तो चौराहे पर बैठी पुलिस हरकत में आई और एक लाइन से सबको खदेड़ दिया। शाम होते- होते वसूली का समय आया तो फड़ वालों ने फिर दुकानें सजा ली। पुलिस और नेताआें के गुर्गों की टैक्स वसूली से शहर की जनता परेशान है। बस अड्डे पर बसे प्रवेश तक नहीं कर पाती हैं।
सैटेलाइट चौराहे पर तैनात पुलिस कर्मी हमेशा यही करते हैं। अखबार में खबर प्रकाशित होती है और सिपाही तत्परता दिखाते हुए इसे हटाते हैं। एक दिन में पांच हजार रुपये से ज्यादा की वसूली यहां से पुलिस कर्मी करते हैं। अगर एक दिन भी अतिक्रमण नहीं लगता तो सिपाहियों और अवैध स्टैंड लगाने वाले धंधेबाजों की जेब भरना मुश्किल हो जाएगी। मंगलवार को सुबह का नजारा राहत देने वाला दिखा। एक भी ठेले वाले चौराहे के आसपास नहीं थे। ऑटो और टेंपो वाले भी सीएनजी के बाद खड़े होने लगे। दोपहर बाद स्थिति फिर वैसी ही हो गई।
- रोडवेज चालक बोले, मिली राहत
रोडवेज के चालकों ने बताया कि उनको कुछ घंटे की राहत अतिक्रमण हटने से हुई है। वैसे बसें लाने पर खूब हार्न बजाना पड़ता है तब जाकर कोई अपना ठेला आगे बढ़ाता है। रोडवेज संघ के अशोक बाबू ने बताया कि कई बार उन्हाेंने खुद अभियान चलाकर डग्गामार वाहनाें को पकड़ा है और कार्रवाई आरटीओ से करवाई है। लेकिन कोई सुधरता नहीं है।
एसपी ट्रैफिक का वर्जन---