सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बावजूद तीन तलाक के मामले थम नहीं रहे हैं। महिलाओं को तलाक का जख्म देकर जिंदगी भर का दर्द दिया जा रहा है। तलाक के बाद शौहर और बीवी के बीच समझौते की पहल भी हो तो हलाला की रस्म आत्मा तक को झकझोर देती है। ऐसे ही एक मामले में तीन तलाक का दर्द झेलने के बाद हलाला की कगार पर पहुंचने वाली एक मुतल्लका (शौहर से अलग हुई महिला) ने हलाला से इंकार कर दिया है। उसका कहना है कि मुतल्लका रह सकती हूं, लेकिन हलाला नहीं करूंगी।
उमरिया गांव की रहने वाली महिला के मुताबिक उसका निकाह 2006 में परसौना निवासी वेल्डर से हुआ था। निकाह के बाद ही दहेज के लिए महिला को प्रताड़ित किया जाने लगा था। महिला के मुताबिक मोटर साइकिल, वाशिंग मशीन, टीवी और सोने की चेन मायके से लाने का उस पर दबाव बनाया गया। महिला के वालिद का इंतकाल उस वक्त हो गया था, जब वह पांच साल की थी। महिला प्रताड़ना सहती रही। इस दौरान उसके तीन बच्चे हुए। जब उस पर दहेज का ज्यादा दबाव बनाया गया तो उन्होंने साफ इंकार कर दिया। तब ससुराल वालों ने मारपीट शुरू कर दी। इससे घबराकर पीड़िता अपनी मां के घर चली गई। कुछ दिनों के बाद गांव के प्रधान ने समझौता करा दिया तो वह सुसराल आ गई।
पीड़िता के मुताबिक ससुराल आने के कुछ दिनों बाद उसे पता चला कि शौहर के गांव की ही एक महिला से अवैध संबंध हैं। बाहर वाली से संबंधों का खुलासा होने के बाद जब उसने शौहर का विरोध किया तो 21 मार्च को उसके साथ पहले मारपीट की गई, फिर तीन तलाक देकर घर से निकाल दिया गया। अब पीड़िता ने एसएसपी कार्यालय में इंसाफ की गुहार लगाई है। मामला कैंट थाने को जांच के लिए सौंपा गया है।
दो तलाक तक हलाला जरूरी नहीं
इस मामले में यदि एक से दो तलाक शौहर ने दिया है तो वह महिला दुबारा उसी शौहर के साथ रह सकती है। ऐसी व्यवस्था शरीयत ने दी है। इसके लिए इद्दत और हलाला की जरूरत नहीं है। दुबारा साथ रहने के लिए बेहतर होगा फिर से दोनों निकाह कर लें। यदि तीन तलाक की बात है तब दोबारा साथ रहने के लिए इद्दत और हलाला करना जरूरी है। - मौलाना शहाबुद्दीन रजवी, राष्ट्रीय महासचिव, तंजीम उलमा इस्लाम