स्टील की रॉड से हमला कर प्रवक्ता पिता की जान लेने वाली 15 साल की लड़की को अपने किए पर कोई पछतावा नहीं है। घबराहट की बजाए कहीं एक सुकून सा है उसके मासूम चेहरे पर। बुधवार को जेल जाने से पहले भी उसने कई बातें बतायी जिनका सार यही था कि अपने पापा के प्रति उसके मन में काफी नफरत भरी थी।
किशोरी बोली, पापा के पहुंचते ही पूरा घर कैदखाना बना रहता था। बंदिशें इतनी थीं कि कोई आवाज ही नहीं निकाल पाता था। कई बार मामूली गलतियों पर मुंह पर थूका गया तो उसे पिता से नफरत हो गई थी। वह अपने पिता को सनकी मिजाज और दोहरे चरित्र का आदमी बताती है। बोली, स्कूल में उनकी छवि सीधे-साधे शिक्षक की थी, लेकिन घर पर रोज जुल्म करते थे। कालोनी में भी इमेज अच्छी नहीं थी। मम्मी को घर से बाहर नहीं निकलते देते थे। नानी के घर जाने की बात पर भड़क जाते थे। उनके सामने तो मुस्कुराना ही गुनाह था। स्कूल जाने और आने के दौरान भी वह टोका टाकी करते थे। विरोध करने पर मारपीट पर उतारू हो जाते थे। घर में कोई आजादी नहीं थी। लिहाफ के अंदर हाथ डालकर सोना गुनाह था। कहते थे कि हाथ बाहर निकालकर सोया करो। स्कूल या ट्यूशन से आने के बाद बिना कपड़े बदले किसी को बिस्तर पर बैठने की इजाजत नहीं थी। किसी को सामान को छू लेने पर हाथ धोना जरूरी था। हम अपने पसंद के कपड़े भी नहीं पहन पाते थे। रविवार और किसी छुट्टी के दिन तो सारी दिन काटना मुश्किल था।
हत्या पर अफसोस नहीं, सजा भुगतने को तैयार
छात्रा का कहना है कि उसका पिता को जान से मारने की इरादा नहीं था। उन्होंने गंदी हरकत की तो आपा खो बैठी, लेकिन उनकी हत्या का उसे अब कोई पछतावा नहीं है। सेल्स डिफेंस में पिता को मारने के बाद उन्हें बचाने की कोशिश की। अब कानून जो सजा देगा उसके लिए तैयार हूं। इस तरह कब तक घुटकर जीती रहती। पिता ने जीना हराम कर दिया था।
घर पर ही पड़ा था शॉकर
छात्रा ने बताया कि पिता ने मोटर साइकिल का शॉकर नया डलवाया था। पुराना शॉकर घर ले आए थे। कहते थे स्टील का है। किसी काम में नहीं आएगा तो बेच दिया जाएगा। शॉकर की रॉड कमरे से उठाकर उसने सिर में पीछे से वार किया। इसके बाद वह गिर पड़े। दो बार रॉड से और हमला किया। इसके बाद उन्होंने उठकर उससे रॉड छीनने की कोशिश की तो उसे लगा यह मार डालेंगे इसलिए उसने फिर से उनके सिर के ऊपर दो-तीन बार हमला कर दिया।
अस्पताल में मौसी के साथ कटी रात
महिला सिपाही और मौसी के साथ छात्रा की रात जिला अस्पताल में कटी। मौसी ने बताया कि रात में कई बार उसकी आंख खुली और ठीक से सो नहीं पाई। आधी रात के बाद अचानक उठकर मम्मी..मम्मी कहकर चिल्लाने लगी। उसने काफी देर समझाकर उसका मन हल्का करने के बाद उसे सुलाया। महिला सिपाही ने भी उसे आश्वासन दिया कि कुछ नहीं होगा। तुमने सेल्फ डिफेंस में मारा है। ईश्वर से प्रार्थना करो। इधर-उधर की बातें सुनने की जरूरत नहीं है।
लोअर पर मिले खून के धब्बे
पिता की हत्या करने वाली छात्रा के लोअर पर पुलिस को खून के धब्बे मिले हैं। प्रभारी निरीक्षक राजेश सिंह ने बताया कि घटना के बाद से छात्रा के कपड़ों पर खून को लेकर सवाल खड़े हो रहे थे। उसके कपड़े कलर होने की वजह से खून के धब्बे नहीं दिखाई दे रहे थे। कुछ धब्बों को उसने कपड़े से साफ कर दिया था। लोअर पर खून के धब्बे दिखाई दे रहे हैं।
पत्नी का दूसरा मोबाइल कहां गया
पुलिस को पता चला है कि प्रवक्ता की पत्नी के पास दो मोबाइल थे। प्रवक्ता और उनकी पत्नी की मोबाइल पुलिस ने कब्जे में लेकर छानबीन शुरू कर दी है। दोनों की कॉल डिटेल निकलवाकर यह पता करने की कोशिश की जा रही है कि इनके बीच रिश्ते खराब होने की वजह कुछ और तो नहीं है। सूत्रों के हवाले से यह भी जानकारी मिली है कि प्रवक्ता की पत्नी के पास दूसरा मोबाइल भी था। जिससे छात्रा अपने पिता की गैर मौजूदगी में भी अपने दोस्तों से बात कर लेती थी। पुलिस ने इस एंगल पर भी जांच करनी शुरू कर दी है।
तकिये पर खून लगा मिला
जिस बेड पर प्रवक्ता लेटे हुए थे। उसके तकिये पर पुलिस को खून का निशान मिला है इसलिए यह भी देखा जा रहा है कि तकिये पर खून कहां से आया। सवाल यह भी है कि कहीं ऐसा तो नहीं है कि कहीं लेटे हुए तो पीछे से हमला नहीं किया गया है। पहला वार होने के बाद प्रवक्ता उठकर आए हों तो फिर से बेटी ने हमला कर दिया हो।
पापा का ही है बनियान
छात्रा ने बताया कि बनियान उसके पापा का ही है। उसने ही उससे फर्श का खून पोंछकर बाथरूम के पास डाला था। हालांकि इस बनियान को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे थे।
अंतिम दर्शन करना चाहती थी
हत्या करने के बाद छात्रा पापा के अंतिम दर्शन करना चाहती थी। उसने मौसी से इच्छा जताई कि मम्मी से किसी तरह उसके पापा का फोटो व्हाट्सएप पर मंगाकर ही दिखा दो।
सिविल सर्विसेज में जाना चाहती थी
किशोरी का कहना था कि उसका सपना डॉक्टर बनकर सिविल सर्विसेज में जाने का था, लेकिन जिंदगी भी अजीब है उसे किस मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया। इम्तहान की तैयारी कर रही थी। इस बार इरादा क्लास में अच्छे नंबर लाने का था, लेकिन पिता की हरकतों से दिमाग हमेशा खराब रहता था। इसकी वजह से उसकी पढ़ाई भी ठीक से नहीं हो पा रही थी। छात्रा ने बताया कि उसके इम्तहान की तारीख अभी नहीं आई है। पता नहीं कब तक जेल में रहना होगा, लेकिन जमानत होने के बाद वह अपनी पढ़ाई को जारी रखेगी।
बाल किशोर गृह भेजा
बरेली। जीआईजी प्रवक्ता की हत्यारोपी उनकी नाबालिग बेटी की गिरफ्तार दिखाकर बुधवार को किशोर न्यायालय में पेश किया। कोर्ट ने उसे न्यायिक हिरासत में राजकीय महिला शरणालय, मुरादाबाद भेज दिया है। महिला पुलिस कर्मियों की निगरानी में महिला अस्पताल स्थित कक्ष में रखने के बाद बुधवार की सुबह थाना बारादरी बुला लिया गया। विवेचक ने मेडिकल कराने के बाद लड़की को किशोर न्यायालय में पेश किया। न्यायालय से लड़की को न्यायिक हिरासत में राजकीय महिला शरणालय, मुरादाबाद भेज दिया गया। मौसी लड़की को छोड़ने पुलिस के साथ मुरादाबाद तक गई।
विवेचना के बिंदु
-प्रवक्ता के घर के सामने लगे सीसीटीवी में किसी के आने-जाने की पुष्टि नहीं हो रही है, लेकिन कैमरे में सिर्फ प्रवक्ता के घर का दरवाजा ही दिखाई दे रहा है। उसकी बाउंड्री कैमरे में कवर नहीं हो रही है इसलिए यह सवाल अब भी बरकरार है कि कोई तीसरा तो घटना से वक्त मौजूद तो नहीं था।
-पति-पत्नी के रिश्ते खराब होने की बात तो विवेचना में सामने आई है, लेकिन पत्नी की मौजूदगी घटना से समय अपने मायके में ही थी। यह बात विवेचना के दौरान पुष्ट हो चुकी है इसलिए हत्या में उनके शामिल होने के आरोप से पत्नी को क्लीनचिट मिल गई है।
-पुलिस की विवेचना में संपत्ति को लेकर कोई विवाद भी अब तक सामने नहीं आया। प्रवक्ता के भाइयों में से किसी ने यह बात विवेचक को नहीं बताई। वह पत्नी पर ही हत्या में शामिल होने का आरोप लगा रहे थे। हालांकि उन्होंने किसी अधिकारी को लिखकर कुछ नहीं दिया है।
-घर में मिले दोनों मोबाइल फोन की कॉल डिटेल से कुछ नई बात सामने आ सकती है। विवेचक ने कॉल डिटेल के लिए आवेदन किया है, लेकिन अभी तक मिल नहीं पाई है।