पिछले साल 17 अप्रैल को लोकसभा चुनाव के लिए हुए मतदान के दिन थाना भमौरा के देवचरा गांव स्थित पोलिंग बूथ पर हरीसिंह जाटव ने वोट न डालने देने से आहत होकर आत्मदाह करके जान दे दी थी। शुरू में पुलिस इस मामले को दबाती रही लेकिन अमर उजाला में इसका लगातार पर्दाफाश किया जाता रहा। हरिसिंह की बेवा के लंबे संघर्ष के बाद 13 जून को कोर्ट के आदेश पर इस मामले में भमौरा थाने में मुकदमा लिखा गया था। एसएसपी ने यह मामला क्राइम ब्रांच को सौंप दिया था। क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर सैयद अनवर अली ने विवेचना के दौरान बीएलओ को दोषी मानते हुए उसे 19 अक्टूबर को गिरफ्तार करके जेल भिजवाकर उसके खिलाफ चार्जशीट लगा दी थी। 31 अक्टूबर को विवेचक मतदान अधिकारी दिलीप कुमार को भी पकड़ लाई थी। दिलीप नगर निगम फरीदपुर के कर्मचारी हैं, इसलिए चार्जशीट लगाने के लिए विवेचक ने डीएम से अनुमति मांगी थी। इस प्रकरण में डीएम ने शासकीय अधिवक्ता से राय लेने के बाद क्राइम ब्रांच को दिए पत्र में कहा है कि निगम के कर्मचारी राज्य कर्मी के दायरे में नहीं आते हैं। इसलिए उसके खिलाफ चार्जशीट लगाने के लिए किसी तरह की अनुमति की जरूरत ही नहीं है। विवेचक ने डीएम की हरी झंडी मिलने के बाद दिलीप कुमार के खिलाफ भी चार्जशीट लगाकर सीओ के पास भेज दी है।