परास्नातक की अर्हता पूरी करने के लिए बीए की डिग्री में फर्जीवाड़ा करने वाले एक गुरुजी आखिरकार जांच के लपेटे में आ ही गए। विवि में बुधवार को हुई परीक्षा समिति की बैठक में मामला उठा जिसके बाद कुलपति ने उच्च स्तरीय जांच कराने को कहा है। उसके बाद डिग्री निरस्त करने का निर्णय लिया जाएगा। इसके अलावा विवि के उस बाबू की भी जांच होगी जिसने चार्ट बदला।
जितेंद्र कुमार निवासी खलीलपुर अमरू मुरादाबाद ने साल 2000 में व्यक्तिगत छात्र के रूप में बीए की परीक्षा उत्तीर्ण की थी। इसमें उसके 1200 में 527 अंक यानी 43.9 फीसदी अंक आए थे। एमए के लिए न्यूनतम अंक 45 फीसदी और बीएड के लिए न्यूनतम 50 फीसदी अंक चाहिए होते हैं। जितेंद्र ने हिंदू कॉलेज से समाज शास्त्र विषय में एमए किया इसके लिए बीए 2002 की मार्कशीट लगाई जिसमें उसको 1200 में से 582 अंक यानी 48.5 फीसदी अंक मिले। उसके बाद उसने बीएड किया। मामला तब उछला जब उसने सहायता प्राप्त स्कूल आदर्श पूर्व माध्यमिक विद्यालय कूरी रवाना मुरादाबाद में हेड मास्टर के लिए हुए साक्षात्कार में उसका चयन हो गया। । इसमें भी खेल किया। सत्र लेट होने से बीएड 2009 में पूरा हुआ जबकि उसने 2008 से 2014 तक अपना शैक्षिक अनुभव प्रमाण पत्र दिया। बीए दो बार नहीं किया जा सकता। उसने विवि के एक बाबू के साथ मिलकर सारा खेल किया। परीक्षा समिति ने मामले की उच्च स्तरीय जांच समिति बना दी है। उसकी डिग्रियां निरस्त करने पर विचार चल रहा है।
मामला परीक्षा में रखा गया था जिसकी उच्च स्तरीय जांच कराई जाएगी। रिपोर्ट के आधार पर ही कार्रवाई की जाएगी। संबंधित बाबू पर भी जांच करके कार्रवाई की जाएगी।
-महेश कुमार, परीक्षा नियंत्रक