अलग अलग मामलों के तीन मुकदमों के विवेचकों ने मुल्जिम की रिमांड अवधि के दौरान एक भी साक्ष्य संकलित नहीं किया। ऊपर से शेष साक्ष्य संकलित करने की बात कहकर रिमांड अवधि बढ़ाने की मांग कर दी। इस पर प्रभारी मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट शक्ति सिंह ने नाराजगी जतायी है और तीनों मामलों में मात्र एक दिन की रिमांड मंजूर करते हुए तीनों मुकदमों के विवेचकों को नौ जून को तलब किया है।
शहर कोतवाली के लूट के मामले में लखीमपुर खीरी का दयाप्रकाश 31 मई से न्यायिक अभिरक्षा में जिला जेल में निरुद्ध है। इस मामले की विवेचना चौकी चौराहा के प्रभारी वीरेन्द्र सिंह राणा कर रहे हैं। न्यायिक अभिरक्षा में जेल में निरुद्ध अभियुक्त के मामले में विवेचना 90 दिन में पूर्ण करनी होती है और विवेचना की प्रगति से अवगत कराने को अधिकतम 14 दिन का न्यायिक रिमांड प्रदान किया जाता है। विवेचनाधिकारी राणा ने बुधवार को रिमांड बढ़ाए जाने का कोर्ट में प्रार्थनापत्र दिया। जिसमें लिखा कि पैरोकार सिपाही ने अवगत कराया कि दयाप्रकाश का रिमांड समाप्त हो रहा है। इस मामले में साक्ष्य संकलित किया जाना शेष है इसलिए रिमांड ली जा रही है।
दूसरा मामला शहर कोतवाली में ही दर्ज धोखाधड़ी के मामले में 18 मई से जिला जेल में बंद मनीश कुमार का है। प्रभारी निरीक्षक व एसएसआई गिरीश प्रसाद ने भी रिमांड के लिए कोर्ट में दिए प्रार्थनापत्र में कहा है कि इस मामले में साक्ष्य संकलित किया जाना शेष है, जबकि पिछली रिमांड से बुधवार तक विवेचना रत्ती भर भी आगे नहीं बढ़ी है। तीसरे मामले में थाना विशारतगंज के विवेचनाधिकारी उपनिरीक्षक कल्यान सिंह ने 26 अप्रैल को केस डायरी का अंतिम पर्चा काटा और उसके बाद बिना विवेचना आगे बढ़ाए यह कह कर मुल्जिम भूरे का रिमांड बढ़ाए जाने की कोर्ट से प्रार्थना की कि इस मामले में साक्ष्य संकलित किया जाना शेष है। तीनों विवेचनाधिकारी से नौ मई को कोर्ट में पेश होकर रिमांड के लिए तर्क प्रस्तुत करने व स्पष्टीकरण देने की अपेक्षा की गई है।