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तो सेना को धोखा देने वाले ऐसे ही छूट जाएंगे!

Fri, 06 Feb 2015 01:09 AM IST
बरेली
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एक तरह से पुलिस ने ही उन्हें जमानत पर बाहर निकालने का इंतजाम कर दिया। इससे पुलिस की आगे की तफ्तीश पर भी संदेह है। परिवार वाले अब यहां के स्थानीय जमानती तलाश रहे हैं। उनका प्रयास है कि शुक्रवार को जमानतदारों के कागज दाखिल हो जाएं।
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भर्ती बोर्ड के कर्नल राजीव दीक्षित ने फर्जीवाड़ा करके सेना में भर्ती होने वाले ग्यारह युवकों के खिलाफ मुकदमा लिखाया था।  इस मामले की विवेचना थाना कैंट के दरोगा रामरतन यादव को मिली लेकिन मामला लटका रहा। फिर एसएसपी ने विवेचना क्राइम ब्रांच को दी तो अजय चौहान विवेचक बने। नए विवेचक भी कोर्ट से कई दफा टाइम मिलने के बाद भी लड़कों का असली पता नहीं तलाश कर पाए। इतना जरूर बताया कि जिन पतों से वे भर्ती हुए थे, वे फर्जी थे। भमौरा के कटका रमन गांव के राघवेंद्र सिंह को छोड़कर किसी का पता सही नहीं मिला। बैग खोले जाने के बाद पुलिस को सभी लड़कों के शैक्षिक प्रमाण पत्र मिल गए हैं। उनके आधार पर सभी का असली पता आसानी से लगाया जा सकता था, लेकिन पुलिस ने इसके लिए प्रयास ही नहीं किया गया। ढिलाई से की गई विवेचना की वजह से कोर्ट से भी सभी आरोपियों को जमानत मिल गई। अब  50-50 हजार रुपये के जमानती देने के बाद सभी की रिहाई हो जाएगी। इसके बाद सेना में सेंध लगाने वाले सभी आरोपी खुलेआम घूमेंगे।

आदेश गूजर से डर गए!
बरेली। विवेचना के दौरान सेना भर्ती के फर्जीवाड़े में मेरठ के आदेश गूजर और एक रिटायर सेना के अधिकारी का नाम सामने आ चुका है। पहले विवेचक को यह जानकारी पकड़े गए लड़कों से ही मिली थी, लेकिन अभी तक किसी का नाम नहीं खोला है। जबकि आदेश गूजर ऐसा नाम है, जो सेना की भर्ती होने के लिए देश भर के सेंटरों पर पहुंचने वाले लड़कों का ठेका कर लेता है। वह लड़कों को सेना में भर्ती कराने के लिए सभी तरीके अपनाता है। मेरठ में वह फर्जीवाड़े में पकड़ा भी गया था, लेकिन जमानत पर रिहा होने के बाद उसने सेना के एक रिटायर अफसर से सांठगांठ करके फिर से यही धंधा करना शुरू कर दिया।  
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यह है मामला
तीस दिसंबर को सेना भर्ती बोर्ड के कर्नल राजीव दीक्षित ने विश्वेंद्र कुमार, संदीप सिंह, राहुल सिंह, श्याम सिंह, राघवेंद्र उर्फ रिंकू, सुमित कुमार, सचिन कुमार, रोहित शर्मा, अमर यादव, अरुण कुमार और सन्नी दियोल को कैंट थाने की पुलिस को सौंप दिया था। इनके निवास प्रमाण पत्र और शैक्षिक प्रमाण पत्र फर्जी हैं। पकड़े गए लोगों में से पांच लोगों का लखीमपुर खीरी का पता है।  दो ने पीलीभीत जिले का और दो ने बदायूं के पते के प्रमाण पत्र लगाए । एक-एक बरेली और आगरा के पते वाले भी इसमें शामिल हैं।

एसपी सिटी राजीव मल्होत्रा
सवाल-फर्जीवाड़ा करके सेना में एंट्री करने वाले पुलिस की ढिलाई से रिहा हो जाएंगे?
जबाव-ऐसा नहीं है, विवेचना के दौरान सभी आरोपियों के असली पते तलाशने की कोशिश की जा रही है। जमानत लेने वालों के बारे में पता करके उनके असली पते हासिल करने की कोशिश करेंगे।
सवाल-पकड़े गए लोगों से असली पता जानने के लिए क्या किया?
जवाब-कानूनन हम  उन्हीं लोगों की रिमांड ले सकते हैं, जिनसे माल बरामद करना होता है। कोर्ट से आदेश लेकर विवेचक जेल में आरोपियों से पूछताछ करने गए थे, लेकिन लड़कों ने असली पता नहीं बताया।
सवाल-भर्ती कराने में आदेश गूजर नाम के जिस दलाल और रिटायर सेना के अधिकारी का नाम सामने आया था। उनके नाम विवेचना में क्यों नहीं खोले गए?
जवाब-विवेचना चल रही है, साक्ष्य इकट्ठे किए जा रहे हैं। संभावना है कि अंदर का कोई व्यक्ति जरूर होगा। जिसका नाम भी विवेचना में सामने आएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई जरूर होगी।
सवाल- इस धंधे में लिप्त लोगों के चेहरे बेनकाब कैसे हाेंगे?
जवाब-जेल गए सभी लड़कों के शैक्षिक प्रमाण पत्र हमारे पास हैं। पहले उनके कॉलेजों में जाकर उनके पते देखे जाएंगे। यहां से भी नहीं असली पते नहीं मिले तो यूपी बोर्ड से मदद लेकर इस रैकेट का पर्दाफाश करेंगे।


सेना में फर्जीवाड़ा करके एंट्री करना गंभीर मामला है।  क्राइम ब्रांच को सभी का जल्द असली पता लगाने के निर्देश दिए हैं। सेना के अधिकारियों से भी इस संबंध में बात करेंगे। चार्जशीट असली पते से ही लगवाई जाएगी-आरकेएस राठौर, डीआईजी  

भर्ती में धोखाधड़ी करने वालों के फर्जी निवास और शैक्षिक प्रमाणपत्र पुलिस को उपलब्ध करा दिए गए हैं। पुलिस से यह भी कहा है कि उन्हें जांच के लिए जिस रिकार्ड की आवश्यकता होगी, वह उपलब्ध कराए जाएगा।
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-कर्नल राजीव दीक्षित, निदेशक- सेना भर्ती
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