माधौपुर अटरिया गांव बुधवार को गम में डूबा था। एक ही घर से चार जनाजे निकले तो वहां मौजूद हर कोई अपने आंसू नहीं रोक पाया। गांव वालों के पास शब्द नहीं थे। हर कोई बस सिसकियां ले रहा था।
पीलीभीत बाईपास पर मंगलवार को भीषण हादसे के शिकार हुए शमशुल खां, उनकी बहू नाजरा, पोता समीर और फहजान खां के शव बुधवार को गांव पहुंचे। इसके बाद गांव ही नहीं आसपास के गांवों के लोग भी वहां पहुंच गए। फिर एक साथ चारों के जनाजे घर से उठे तो माहौल गमगीन हो गया। क्या हिंदू क्या मुस्लिम सभी अंतिम यात्रा में शामिल हुए। आधा किलोमीटर की दूरी पर स्थित कब्रिस्तान पहुंचने में एक घंटे से अधिक समय लग गया। हर कोई जनाजे को कंधा देना चाहता था। जनाजे की नमाज खानदान-ए-आला हजरत तसलीम मियां ने पढ़ाई। फिर उन्हें कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए खाक कर दिया गया। शमशुल खां की चार पोतियों का रो रो कर बुरा हाल था।
बहेड़ी के विधायक अताउर्रहमान, वफाउर्रहमान, तनवीर अहमद, प्रधान जाफर खां, प्रेमशंकर गंगवार, रामपाल गंगवार, पूर्व बीडीसी सदस्य राजेंद्र प्रसाद गंगवार, पूर्व प्रधान नन्हें सिंह, शांति पाल, नीतिश उपाध्याय, तसव्वर खां आदि ने खिराजे अकीदत पेश की।
शमसू के तीसरे पौते उवैश की भी मौत
-माधौपुर अटरिया गांव में एक की परिवार के चार शवों को दफनाने का इंतजाम किया जा रहा था, तभी शमशुल खां के नौ साल के पोते उवैश की मौत की भी खबर आ गई। वह भी मंगलवार को हुए हादसे में घायल हो गया था। उसने बुधवार को उपचार के दौरान दम तोड़ दिया।