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जच्चा-बच्चा की मौत मामले में होगी एफआईआर 

Sat, 22 Oct 2016 12:51 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली
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कोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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जिला महिला अस्पताल में मीरगंज सीएचसी से रेफर घनश्याम की पत्नी नेमवती और उसके बच्चे की मौत 23 जुलाई, 2016 को हो गई थी। इस मामले में लापरवाही का आरोप लगाया गया था, लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने बिना पीड़ित के बयान लिए जांच रिपोर्ट जमा कर दी थी। इस पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कुसुम लता राठौर ने थाना शाही के ग्राम हल्दी कलां निवासी घनश्याम के प्रार्थनापत्र पर जच्चा-बच्चा वार्ड के प्रभारी के खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्जकर विवेचना की कार्यवाही करने का प्रभारी निरीक्षक कोतवाली को आदेश दिया है। 
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    घनश्याम ने अपनी पत्नी नेमवती को सीएचसी मीरगंज से रेफर करने पर 22 जुलाई को अपराह्न चार बजे जिला महिला चिकित्सालय की इमरजेंसी में आशा कार्यकत्री के साथ भर्ती कराया। आरोप है कि मौजूद डॉक्टरों ने नेमवती का उपचार नहीं किया। रात साढ़े 9 बजे डॉक्टर ने घनश्याम को बताया कि उसकी पत्नी के गर्भ में दो बच्चे हैं आपरेशन करना पड़ेगा। घनश्याम आपरेशन को तैयार हो गया लेकिन डॉक्टरों ने न तो आपरेशन किया और न ही कोई बेड उपलब्ध कराया। नेमवती प्रसव पीड़ा से छटपटाती रही। उसका हीमोग्लोबिन आठ था फिर भी रक्त नहीं चढ़ाया गया। घनश्याम ने एक यूनिट खून भी लाकर दिया, लेकिन डॉक्टरों ने आपरेशन नहीं किया और न ही खून चढ़ाया। 23 जुलाई की रात 9.45 बजे नेमवती ने एक बच्चे को फर्श पर ही जन्म दिया। दूसरे बच्चे के जन्म से पहले उसकी मौत हो गई। घनश्याम की शिकायत पर जिलाधिकारी ने एक जांच समिति गठित कर दी थी, लेकिन घनश्याम के बयान भी नहीं लिए गए। घनश्याम ने उच्चाधिकारियों से लिखित शिकायत की, लेकिन कोई कार्यवाही न होने पर घनश्याम ने अधिवक्ता मोहन स्वरूप लोधी के माध्यम से कोर्ट में प्रार्थना पत्र देकर रिपोर्ट दर्ज कराने की गुहार लगाई। 
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