इस मुकदमे के वादी सपा नेता इरशाद खां समेत दो लोगों के खिलाफ पहले ही मुकदमा लिखा जा चुका है। इस प्रकरण में आरोपियों के आवेदन पत्रों पर रिपोर्ट लगाने वाले लेखपाल और दरोगाओं की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। अब इनके खिलाफ कार्रवाई का इंतजार है। पता चला है कि बिचौलिए ने रिश्तेदारों की मदद से लाइसेंस बनवाने वालों को फंसाया। ज्यादातर शस्त्र लाइसेंस नेताओं की सिफारिश पर बने हैं।
इकबाल खां, मैसर हुसैन का शस्त्र लाइसेंस वर्ष 2000 में बना था। इसके लिए सपा विधायक शहजिल इस्लाम के दादा अशफाक हुसैन ने 22 जून 1199 को सिफारिशी पत्र दिया था। डीएम को संबोधित इस सिफारिशी पत्र में उन्होंने कहा है कि इकबाल को भेज रहा हूं, इनका लाइसेंस स्वीकृत कर दो। इसी तरह फर्जी पतों पर बने और भी शस्त्र लाइसेंसों पर नेताओं के सिफारिशी पत्र लगे हुए हैं।
डीआईजी ने फर्जी लाइसेंस मामले में सपा नेता इकबाल खान की शिकायत मिलने पर 26 नवंबर 2014 को जांच एएसपी पीलीभीत सुधीर कुमार सिंह को दी थी। एएसपी ने रिमाइंडर भेजने पर दो महीने बाद डीआईजी को जांच रिपोर्ट भेजी भी, लेकिन उसमें स्पष्ट कुछ नहीं था। डीआईजी के नाराजगी जताने पर एसपी पीलीभीत ने मामले को संभाला। शिकायत में इकबाल ने अपने बारे में भी बताया था कि वह पीलीभीत जिले कीबीसलपुर के मीरपुर वाहनपुर गांव का रहने वाला है। ब्लाक भुता के डंडिया नवाजिश अली गांव स्थित उनकी ससुराल के पते पर सिंगल बैरल बंदूक का शस्त्र लाइसेंस बना है। इसी गांव के आबिद हुसैन का बारादरी के पते पर, सिद्दीक अहमद का दीदार बख्श, फरीदपुर के पते पर रायफल का लाइसेंस बना है। बीसलपुर के ही महादेवा गांव के बुंदा खां ने दो नाली बंदूक, अभयपुर चेना नकटी गांव के रहीसउद्दीन खां ने दो नाली बंदूक, अताउल्ला ने रायफल, मसीयार खां ने दो नाली बंदूक, मुन्ने खां ने बंदूक, मुंशी खां ने बंदूक का लाइसेंस ग्राम परसौना, थाना बिथरी के पते से बनाया है। इसी गांव के सिद्दीक अहमद का भी परसौना गांव के ही फर्जी पते पर लाइसेंस जारी हुआ है। वर्ष 2000 से 2002 में यह शस्त्र लाइसेंस बने हैं।
बिचौलिए ने रिश्तेदार की मदद से बनवाए लाइसेंस
बरेली। इकबाल खां ने बताया कि परसौना गांव के मसीउद्दीन के छोटे भाई की ससुराल बीसलपुर इलाके के अभयपुर चेना नकटी गांव के रहीसउद्दीन खां के यहां है। रहीस के जरिए मसीउद्दीन ने पहले अपने भाई के गांव के कुछ लोगों के शस्त्र लाइसेंस बनवाए। इसके बाद उन्होंने क्षेत्र के बाकी लोगों के फर्जी पते पर शस्त्र लाइसेंस बनवा दिए। इसके लिए उन्होंने हर व्यक्ति से 25-25 हजार रुपये लिए हैं। मसीउद्दीन का कोई रिश्तेदार कलेक्ट्रेट में नौकरी करता है। वह उनके इस धंधे में शामिल है। ठेका लेकर उसी की मदद से मसीउद्दीन लोगों के शस्त्र लाइसेंस बनवाता था।
कार्रवाई को पुलिस से एफआईआर मांगी
बरेली। फर्जी पतों के आधार पर बनाए गए शस्त्र लाइसेंसों को निलंबित और निरस्त करने के मामले में अभी तक प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से कोई कार्रवाई नहीं हुई है। एडीएम सिटी आलोक कुमार का कहना है कि पुुलिस से रिपोर्ट मांगी गई है। उसी के आधार पर निलंबन और निरस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा इन लाइसेंस के लिए सिफारिश करने वाले राजस्व और पुलिस कर्मियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। यह पता किया जाएगा कि इन लाइसेंस पत्रावलियों पर संस्तुति करने वाले लेखपाल, तहसीलदार और एसडीएम तथा थाना प्रभारी कौन-कौन थे।