जहरीली शराब के दंश से बरेली जिला भी अछूता नहीं है। यहां जहरीली शराब पीने से दर्जनों लोगों की जान जा चुकी है। पुलिस और आबकारी विभाग वालों पर कार्रवाई भी हुई थी। बावजूद इसके जिले में कच्ची शराब की बिक्री नहीं रुक रही है।
मीरगंज इलाके के दियोसास गांव के इतिहास में मई 2006 काले पन्ने के रूप में दर्ज हो चुका है। वहां निवासी रामकुमार की बेटी कस्तूरी की बारात आई थी। उस दिन रामकुमार के घर दावत में आए रिश्तेदारों, बारातियों और गांव के लोगों ने कच्ची शराब पी थी। शराब जहरीली थी, जिसका असर हुआ तो पीने वालों की तबियत बिगड़ गई और 28 लोगों की मौत हुई थी। इनमें 14 लोग उसी गांव दियोसास और तीन पड़ोस के ग्राम परौर के रहने वाले थे। बाकी 11 मृतक अलग-अलग गांवों के रहने वाले थे। इस घटना से शासन तक खलबली मची और इलाके के सीओ, एसओ, हल्का इंचार्ज और आबकारी इंस्पेक्टर सस्पेंड कर दिए गए थे। जहरीली शराब बेचने के आरोप में दियोसास के मस्तान शाह, उसका बेटा बाबू शाह और नोनीराम जेल गए थे। इनमें केवल नोनीराम को कोर्ट से जमानत मिली थी। मस्तान शाह की जेल में मौत हो गई। बाबू शाह अभी भी जेल में है।
जहरीली शराब पीने से बहेड़ी इलाके में चार लोगों की जान जा चुकी है। इनमें दिसंबर 2011 में बंजरिया गांव के भूपेंद्र, अक्टूबर 2014 परसुरामपुर गांव के रामसिंह, मई 2015 लहसोई गांव का सतीश और 2008 में पिंदारी गांव के मुन्ने की मौत हुई थी। वर्ष 2016 में हुए ग्राम प्रधान चुनाव प्रचार के दौरान एक प्रत्याशी द्वारा कच्ची शराब पिलाने से नवाबगंज थाना के गांव त्यार जागीर निवासी छुटक्का नाम के युवक की मौत हो गई थी। इससे दो साल पहले वहीं परोथी गांव में कच्ची शराब से दो लोगों की जान गई थी।
करीब डेढ़ दशक पहले शहर के हरूनगला में शराब कांड हुआ था। तब देशी शराब के पाउच में रीपैकिंग करके बेची गई कच्ची दारू पीने से करीब डेढ़ दर्जन लोगों की मौत हुई थी। इस घटना ने शासन तक खलबली मचा दी थी। इस कांड का माफिया तेजा जेल भी गया था।
अब चला अभियान, दो गिरफ्तार
एटा जिले के अलीगंज में शराब पीने से 28 लोगों की मौत होने के बाद खलबली मची तो बरेली पुलिस और आबकारी अधिकारियों की नींद खुल गई। अफसरों के निर्देश पर रविवार को छुट्टी होने के बावजूद पुलिस और आबकारी विभाग की टीमों ने कई जगह छापामार कार्रवाई की। इस दौरान शराब बनाने के आरोप में दो व्यक्तियों को पकड़ लिया गया। दर्जनों लीटर कच्ची शराब और लहन बरामद हुआ।
पुलिस और आबकारी विभाग की संयुक्त टीम ने भेजीपुरा इलाके के कंचनपुर गांव में 150 लीटर कच्ची शराब, 4 हजार लीटर से अधिक लहन, शराब बनाने के उपकरण और अन्य सामान नष्ट किया गया। हालांकि शराब बनाने वाला एक भी व्यक्ति टीम के हत्थे नहीं चढ़ा। आबकारी अधिकारी एमएल द्विवेदी ने बताया कि जिले में कच्ची शराब के खिलाफ अभियान शुरू किया गया है।
आंवला। रविवार को कोतवाली पुलिस ने रहटुइया गांव के जंगल में छापा मारकर कच्ची शराब बना रहे बृजराज को दबोच लिया। मौके पर कच्ची शराब और शराब बनाने के उपकरण बरामद हुए। कोतवाल ने बताया कि अलग-अलग स्थानों से शराब की बिक्री कर रहे छह लोगों हिरासत में लिया गया है।
नवाबगंज। रविवार को थाना पुलिस ने ग्राम बुखारपुर में छापा मारकर कच्ची शराब बना रहे अमरसिंह को गिरफ्तार कर लिया। एसएसआई मुकेश शर्मा ने बताया कि मौके पर दस लीटर लहन, गैस सिलेंडर और शराब बनाने के उपकरण मिले।
शहर से गांवों तक फैला कच्ची शराब के धंधेबाजों का नेटवर्क
बरेली। शासन और प्रशासन कार्रवाई करने के चाहे जितने दावे करे, लेकिन जिले में कच्ची शराब का अवैध कारोबार रुकने के बजाय बढ़ता जा रहा है। शराब पीने से किसी की मौत होने के बाद दो-चार दिन कार्रवाई करने का दिखावा किया जाता है। उसके बाद पुलिस और आबकारी विभाग दोनों ही शांत हो जाते हैं। लोगों का कहना तो यह है कि कच्ची शराब जिम्मेदारों के लिए आमदनी का एक जरिया है। कच्ची शराब बनाने और बेचने वालों का नेटवर्क शहर से लेकर देहात तक फैला है। शहर के मोहल्ला गंगापुर, कटकुइयां, सिकलापुर, आजमनगर आदि इलाकों में शराब खुलेआम बेची जाती है। इसी तरह देहात में रामगंगा की कटरी से सटे बभिया, मिर्जापुर, गंगापुर, नबीनगर, चौबारी, अखा, क्यारा समेत दर्जनों गांव में भट्ठियां धधकती रहती हैं। नवाबगंज थाना क्षेत्र के ग्राम त्यार जागीर और परोथी के कई घरों में कच्ची शराब बनती है। इनके अलावा भोजीपुरा, रिठौरा, नवाबगंज, बहेड़ी, मीरगंज, आंवला, फरीदपुर समेत जिले के तमाम गांवों में कच्ची शराब बनाई और बेची जाती है। संबंधित थाने की पुलिस कच्ची शराब बनाने वालों पर कार्रवाई करने के बजाय वसूली में लगी रहती है।