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नशे में धुत नौसिखिए ने कार से बच्चों को रौंदा, एक की मौत 

Sun, 18 Feb 2018 01:51 AM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
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रामगंगा कॉलोनी में शराब पीकर कार चलाना सीख रहे दो युवकों ने एक बच्चे की जान ले ली, जबकि एक किशोर गंभीर रूप से घायल हो गया। इस दौरान घर के बाहर खेल रहे करीब छह बच्चे बाल-बाल बच गए। गंभीर रूप से घायल किशोर को रुहेलखंड मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है। उसके दोनों पैर में फ्रैक्चर हुआ है। रामगंगा चौकी पुलिस ने एक युवक समेत कार को अपने कब्जे में लिया, जबकि उसका साथी भाग गया। जिस वक्त हादसा हुआ कार के अंदर भी आठ-दस बच्चे मौजूद थे। हादसे से गुुस्साये लोगों ने हंगामा किया।  
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शनिवार शाम करीब चार बजे ब्याज पर रुपया देने वाला संतोष कॉलोनी में कार चलाना सीख रहा था। उसके बगल की सीट पर रमेश बैठा था। दोनों ही शराब के नशे में धुत थे। इस दौरान कई बच्चे घरों के बाहर खेल रहे थे। अचानक कार अनियंत्रित होकर खेल रहे बच्चों पर चढ़ गई। हादसे में अमन (11) की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि महबूब मियां का बेटा फहीम (15) गंभीर रूप से घायल हो गया। कॉलोनी के लोगों के मुताबिक हादसे के बाद संतोष कार छोड़कर भाग निकला। रामगंगा चौकी प्रभारी कमलेश मिश्र ने अमन का पंचनामा भरकर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। पुलिस कार को चौकी पर ले गई। मौके से रमेश नाम के एक युवक को पकड़ा गया है, जो संतोष को कार चलाना सिखा रहा था। इन लोगों ने कार में कॉलोनी के आठ-दस बच्चों को भी बैठा रखा था।

हादसा दर्दनाक है। बच्चे का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। कार चलाने वाले के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। 
- रोहित सिंह सजवाण, एसपी सिटी 


तलाशी में कार के अंदर मिली शराब की बोतल 

पुलिस को कार की तलाशी में शराब की बोतल मिली। संतोष और रमेश दोनों ने ही बहुत ज्यादा शराब पी रखी थी। हादसे के बाद पीड़ित परिवार के लोगों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने आरोपी संतोष को भागने का पूरा मौका दिया। अगर पुलिस चाहती तो उसे पकड़ा जा सकता था।
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अमन के पिता दिनेश वर्मा किराये पर डीसीएम चलाते हैं। उनकी पत्नी सोना वर्मा दिव्यांग हैं। दिनेश ने बताया कि हादसे के बाद कार के अंदर से शराब की बोतल निकली थी। उसमें बहुत थोड़ी ही शराब बची थी। संतोष और रमेश दोनों शराब के नशे में बताये जा रहे हैं। रुहेलखंड मेडिकल कॉलेज में मौजूद महबूब ने बताया कि संतोष ने दो दिन पहले ही नई ईको कार खरीदी थी। उसे कार चलानी नहीं आती थी, इसलिए उसने रमेश को कार सिखाने के लिए बुलाया था। जब दोनों कार चला रहे थे, तो उन्होंने कॉलोनी के आठ-दस बच्चों को भी कार में बैठा रखा था। नशे में होने के कारण ही कार अनियंत्रित होकर घर के बाहर खेल रहे बच्चों पर चढ़ गई। 
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