जिले के डॉक्टर पोस्टमार्टम ड्यूटी को लेकर संजीदा नहीं है, जिससे शव के साथ आने वालों को कई असुविधाओं को सामना करना पड़ रहा है। दिन के दो बजे ड्यूटी पर आने वाले डॉक्टर शाम होते ही गायब हो जाते हैं, जिससे रात में पोस्टमार्टम कराने में दिक्कतें होती हैं।
परेशानी का ऐसा ही एक मामला मंगलवार की रात को पोस्टमार्टम हाउस पर देखने को मिला। नेशनल हाईवे पर स्थित उचौलिया कस्बे में शारदा नहर के पास हुई सड़क दुर्घटना में मारे गए तीन साइकिल सवारों के शवों के पोस्टमार्टम के दौरान देखने को मिला। शवों का डीएम ने रात में ही पोस्टमार्टम करने के लिए सीएमओ को निर्देशित कर दिया। बताते हैं कि इस दौरान पोस्टमार्टम ड्यूटी से जिला अस्पताल के डॉक्टर गायब मिले। फिर क्या था डीएम का निर्देश और डॉक्टर की गैर मौजूदगी इससे वहां हड़कंप मच गया। इसके बाद डॉक्टर की तलाश शुरू हो गई, लेकिन जब काफी देर तक डॉक्टर नहीं मिले तो सीएमएस ने डॉ. राजीव राजपूत से शवों का पोस्टमार्टम कराया।
सुबह आठ से दूसरे दिन आठ बजे तक की है ड्यूटी
सीएमएस का कहना है कि पोस्टमार्टम ड्यूटी सुबह आठ से लेकर दूसरे दिन के आठ बजे तक रहती है। यदि डॉक्टर सीएचसी, पीएचसी के हैं तो उन्हें रात में भी जिले पर रुकना चाहिए, जिससे विषम परिस्थितियों में रात में भी पोस्टमार्टम किया जा सके।
समय से हो पोस्टमार्टम तो परेशान न हो घरवाले
सीएमएस का कहना है कि जिस डॉक्टर की ड्यूटी पोस्टमार्टम में लगाई जाती है, उसे समय से आकर पोस्टमार्टम शुरू कर देना चाहिए, लेकिन डॉक्टर दो बजे के बाद पोस्टमार्टम करना शुरू करते हैं, जिससे पोस्टमार्टम देर तक होते हैं। ऐसे में उसी दिन शव का अंतिम संस्कार नहीं हो पाता है और घरवालों को परेशान होना पड़ता है।
मंगलवार को डॉ. मोहित तिवारी की पोस्टमार्टम ड्यूटी थी, लेकिन रात में गायब मिले। ऐसी पुनरावृत्ति न हो इसके लिए डॉक्टर और फार्मासिस्टों को ड्यूटी के दौरान जिला मुख्यालय न छोड़ने की चेतावनी जारी की है। आगे से यदि ऐसा मामला मिलता है तो कार्रवाई के लिए शासन को लिखा जाएगा।
डॉ. अरुण कुमार गौतम, सीएमएस जिला अस्पताल