Divorce will be punished if the daughter is born
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बेटी पैदा होने पर भी तलाक के मामले सामने आने पर इस्लाम में औरतों की स्थिति को लेकर तमाम सवाल उठ रहें हैं। इस मुद्दे पर शहर के कुछ दानिश्वर उलमा के अनुसार इस्लाम में औरत की बड़ी अहमियत और बड़ा मकाम हासिल है। यहां तक कि उसके पैरों के नीचे जन्नत मानी गई है।
अरब में 1600 साल पहले जिसके घर में बेटी पैदा होती थी उस घर को और औरत को मनहूस समझा जाता था। लोग लड़की पैदा होने के बाद उसको जिंदा दफना देते थे, मगर बाद में पैगंबरे इस्लाम ने इसके खिलाफ एक बड़ा आंदोलन चला कर बताया कि जिसके घर में लड़की पैदा होती है, वो जहमत नहीं बल्कि खुदा की रहमत होती है। उस लड़की के नसीब से खुदा पूरे परिवार में खुशहाली देता है।
तंजीम उलमा इस्लाम के महासचिव मौलाना शहाबउद्दीन रजवी ने कहा कि जो लोग लड़की पैदा होने पर बीवी को तलाक दे देते हैं, घर के बाहर कर देते हैं या परेशान करते हैं ऐसे मर्द शरीयत की रोशनी में सख्त गुनाहगार हैं। उनको अपने सामने पैगंबरे इस्लाम की सीरत और किरदार को रखना चाहिए। ऐसे लोग इस्लाम से पहले अरब की जिहालत को जिंदा रखना चाहते हैं जो इस्लामी तारीख के खिलाफ हैं। उन्हें खुदा के यहां सख्त सजा मिलेगी।
मंजरे इस्लाम दरगाह आला हजरत के मुफ्ती डा. एजाज अंजुम ने कहा है कि लड़की या लड़का पैदा होना कुदरत की बात है अल्लाह की मर्जी है। इसमें मर्द या औरत की कोई कमी नहीं है। लड़की पैदा होने पर अगर मर्द ने बीवी को तलाक देना कुदरत या अल्ला की मर्जी के खिलाफ आवाज उठाना है। रसूल का फरमान है कि हलाल चीजों में अगर कोई सबसे बुरी चीज है तो वो तलाक है।
खानकाह वामिकी के सज्जादानशीन मौलाना सय्यद असलम मियां वामिकी का कहना है कि हर इंसान को चाहिए कि वो अल्ला की मर्जी पर खुश रहे है और कुदरत पर यकीन करे। लड़का या लड़की के दुनिया में आने पर बीवी को दोष देना या तलाक देना गुनाह है और खुदा की रजा पर नाखुशी जाहिर करना है। ऐसा करने वालों को खुदा इसकी सजा देगा।