जिला कारागार के 73 साल के बंदी रामस्वरूप की मौत हो गई। परिवार वालों ने जेल प्रशासन को उनकी मौत का जिम्मेदार ठहराया है। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के बाद परिवार वालों को सौंप दिया। 21 मार्च को जीआरपी रेलवे जंक्शन थाने के दरोगा सतेंद्र सिरोही ने हारूनगला स्थित गुप्ता बैंकट हाल से उठाकर राम स्वरूप को आधा किलो स्मैक के साथ जेल भेजा था। राम स्वरूप के बेटे मुकेश गुप्ता का आरोप है कि इससे पहले जीआरपी ने उठाकर उसके पिता को सुविधा शुल्क लेकर छोड़ दिया था। उन्होंने कोर्ट में वाद दायर करके आरोपियों के खिलाफ मुकदमा लिखाने की गुहार लगाई थी। इसके बाद जीआरपी समझौता कराने के दबाव बना रही थी। बुधवार को उसके पिता की कोर्ट में तारीख थी। वह कोर्ट नहीं आए, पता लगा कि वह बीमार है। जिला कारागार जाने पर पता लगा कि उसके पिता के पेट में दर्द होने पर उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया है। थोड़ी देर बाद ही उनकी मौत की खबर आ गई। राम स्वरूप की मौत से उनकी पत्नी राम लली साली रामरखी का बुरा हाल है। मुके श का कहना है कि जेल प्रशासन की लापरवाही से उसके पिता की मौत हुई है। वह इस मामले की शिकायत मानवाधिकार आयोग तथा आला अफसरों से करके इंसाफ की गुहार लगाएंगे।