प्रदेश सरकार ने बच्ची और महिलाओं को एक ही छत के नीचे कानूनी और मेडिकल सुविधा उपलब्ध कराने की मंशा से आशा ज्योति केंद्र खोले। महिला दिवस पर आठ मार्च को ही बड़े उत्साह से इस केंद्र का उद्घाटन हुआ था लेकिन 11 दिन बाद यह केंद्र बेकार साबित हो गया। शनिवार को एक मूक बधिर बच्ची जिसकी उम्र करीब 12 साल होगी, परिसर की रिपोर्टिंग चौकी में बैठी रही, उसे न परिजनों से मिलाने की कोशिश की गई, न ही उसका मेडिकल कराया गया। परिसर में खुले मेडिकल सेंटर में पिछले दो दिन से डाक्टर नहीं बैठ रहा, जिस कारण बच्ची का मेडिकल भी नहीं हो सका। बस पुलिस ने बच्ची को चाइल्ड लाइन के हवाले कर दिया, जिसके बाद बिना मेडिकल कराए ही उसे देर शाम नारी निकेतन भेज दिया गया।
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मिनट टू मिनट
- रात बारह बजे एक टेंपो चालक बच्ची को महिला थाने सौंप गया। चालक ने कांस्टेबल को बताया कि बच्ची अन्य सवारियों के साथ बैठ टेंपो में बैठी, बाकी सवारियां उतर गईं पर वह अपना पता नहीं बता सकी। जिसके बाद वह उसके थाने ले आया।
- बच्ची दोपहर पौन बजे महिला कांस्टेबल संग रिपोर्टिंग चौकी पहुंची। इंचार्ज ने बच्ची से पूछताछ करने की कोशिश की, पर वह संकेत में कुछ नहीं बता सकी और न ही लिख सकी।
- चाइल्ड लाइन इंचार्ज गजेंद्र बच्ची को दो बजे मेडिकल कराने का कहकर अपने साथ ले गए।
- शाम पांच बजे बच्ची को बिना मेडिकल कराए ही नारीनिकेतन भेज दिया गया।
सुबह चार बजे एक टेंपो चालक मूक बधिर बच्ची को थाने में छोड़ गया। चालक का नाम और पता नहीं लिखा गया है। हमारी जिम्मेदारी उसे आशा ज्योति केंद्र पहुंचाने की थी, जो हमने पूरी कर दी।
- विजय सिरोही, एसओ महिला थाना
यह गलत सूचना है, बच्ची को रात 12 बजे एक टेंपो चालक मेरे सामने महिला थाने उतार गया।
- प्रेमपाल वार्ष्णेय, चौकी इंचार्ज, चौकी चौराहा
आशा ज्योति केंद्र में जिस डॉक्टर को मेडिकल चेकअप करना है, वे आज नहीं आए। इस कारण मेडिकल नहीं हो सका, दो बज चुका था इसलिए मैं बच्ची का मेडिकल कराने जिला अस्पताल नहीं गया। उसे शाम पांच बजे नारीनिकेतन पहुंचवा दिया है। अब कल मेडिकल करवाएंगे।
- जितेंद्र, जिला समन्वय, चाइल्ड लाइन
बच्ची कुछ भी बता नहीं पा रही थी, हमने उसे चाइल्ड लाइन को सौंप दिया। इस केस में गुमशुदगी दर्ज नहीं हो सकती थी, अन्य थानों को वायरलेस से सूचना भेजी जा सकती थी, जो मेरे द्वारा नहीं कराया गया।
- शारदा चौधरी, रिपोर्टिंग चौकी इंचार्ज