मीरगंज के बाद फरीदपुर तहसील में पारिवारिक लाभ योजना का लाभ अपात्रों को देने की जांच हो गई है। यहां के 31 मृत्यु प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए। एसडीएम की जांच में चार लेखपालों को दोषी पाया है। इनकेे निलंबन की संस्तुति की जा रही है।
अक्टूबर में पकड़े गए तीन तहसीलों के 118 मामलों में से फरीदपुर तहसील के 32 थे, जिनमें से जांच में 31 फर्जी पाए गए हैं। इन्हें लेखपालों ने सही होने की रिपोर्ट दे दी थी, जिसके आधार पर तहसीलदार और एसडीएम ने इन्हें हस्ताक्षर करके जारी कर दिया। डीएम के आदेश पर की जांच में एसडीएम ने पाया कि लेखपालों ने रैकेट की मिलीभगत से यह खेल किया। बदले में उन्होंने पैसे भी लिए। फरीदपुर के एसडीएम प्रशांत शर्मा ने इन लेखपालों के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश तहसीलदार को दिए हैं। इन चारों को निलंबित करने के निर्देश भी दिए गए हैं। अब इन लेखपालों से रैकेट के बारे में जानकारी ली जाएगी। जांच में उनसे पूछा जाएगा कि किनके इशारे पर उन्होंने फर्जी प्रमाणपत्रों पर असली की रिपोर्ट लगाई ताकि फरीदपुर तहसील में भी समाज कल्याण विभाग की योजनाओं का पैसा हड़पने वाले गिरोह के सदस्य सामने आ सकें।
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इन लेखपालों की संस्तुति
लक्ष्मीशंकर पांडेय, विजय आनंद, रामनाथ और सुरेश बाबू।
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सदर तहसील में भी होगी जांच
पारिवारिक लाभ योजना में फर्जीवाड़े की जड़ें सदर तहसील से भी जुड़ी हो सकती हैं। इसी संदेह के आधार पर एसडीएम सदर मनीष नाहर ने खुद ही जांच कराने का फैसला लिया है और इस जांच प्रक्रिया से लेखपालों को दूर रखा जाएगा। एसडीएम खुद कानूनगो के साथ गांववार मामलों की जांच करेंगे। उन्होंने गांववार लाभार्थियों की सूची बनाने के निर्देश स्टाफ को दिए हैं। इसके बाद वो कानूनगो की टीम बनाकर रेंडम चेकिंग करेंगे।
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क्यों चुप हैं एके सिंह
पारिवारिक लाभ योजना में 118 फर्जी मृत्युप्रमाणपत्र सामने लाने वाले जिला समाज कल्याण अधिकारी एके सिंह मीरगंज तहसील में रैकेट के खुलासे के बाद अपने कार्यालय के कर्मचारियों की भूमिका पर चुप क्यों हैं? यह सवाल अब उठने लगा है। रैकेट के पकड़े गए सदस्य ने पुलिस और एसडीएम की पूछताछ में समाज कल्याण विभाग के दो कर्मचारियों के नाम लिए। यह भी कहा कि एक को हाल ही में नई बाइक उपलब्ध कराई गई। उसके बाद से विकास भवन स्थित समाज कल्याण विभाग में खलबली मची हुई है लेकिन कर्मचारियों पर कार्रवाई के सवाल पर जिला समाज कल्याण अधिकारी एके सिंह लगातार चुप्पी साधे हुए हैं। शुरू में पुलिस और एसडीएम की रिपोर्ट आने पर ही कार्रवाई करने की बात कह रहे थे लेकिन अब इस मामले में कुछ भी बताने से लगातार कतरा रहे हैं।