मोहल्ला फूटा दरवाजे के नाजिम और पर्वत अली की असल लड़ाई तो वक्फ की जमीन को मामूली रकम में लेकर लाखों कमाने की है। इस लड़ाई में पहले भी तमंचे और बंदूक निकल आए थे। सोमवार को चेयरमैन ने पंचायत कराकर मामला निपटाने की कोशिश की तो उन्हीं के सामने दोनों पक्ष आपा खो बैठे और दोनों पक्षों के लोगों ने तमंचों और बंदूकों से जमकर फायरिंग की। इससे मोहल्ले में दहशत फैल गई। यह लड़ाई अभी थमी नहीं है, वक्फ की इस जमीन के मामले को पुलिस ने ढीलेपन से लिया तो खून खराबा होना तय है।
जिले में वक्फ संपत्तियों पर तमाम लोगों की नजर है। ज्यादातर ऐसी वक्फ संपत्तियां हैं जिनपर लोगों ने कब्जा कर रखा है। मोहल्ला फूटा दरवाजे के नाजिम और पर्वत वक्फ की बाइक बीघा जमीन को लेकर लड़ रहे हैं, उस पर मोहल्ले के लोग भी लोगों की नजर है। सूत्रों का कहना है कि इस संपत्ति पर नजर रखने वाले लोग नाजिम और पर्वत अली में समझौता होने ही नहीं देंगे। यही वजह है कि सोमवार को सुबह ग्यारह बजे नाजिम से चेयरमैन ने समझौते को बात शुरू की तो कुछ लोग विरोध करने लगे। कहने लगे हम झुक कर समझौता नहीं करेंगे। बाद में किसी तरह चेयरमैन ने समझाकर लोगों को शांत किया। लेकिन चेयरमैन बात करने के बाद नाजिम के पास से उठ तक नहीं पाए थे कि अचानक एक फायर हुआ। फायर किसने किया, यह बात अभी तक न तो पुलिस की जानकारी में हैं और न ही चेयरमैन को पता है। लेकिन फायर से छर्रे चेयरमैन और उनके गनर को लग गए। इसके बाद तो खून खराबे की नौबत आ गई। ऐसा लग रहा था कि जैसे पहले से ही दोनों पक्षों के लोगों ने तैयारी कर रखी थी। दोनों तरफ से ताबड़तोड़ फायरिंग के साथ फायर होने लगे। चेयरमैन भी माहौल खराब होने पर वहां के चले आए। देखते ही देखते नाजिम और उसके पक्ष के नौ लोग जख्मी हो गए। घटना की सूचना पर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला। एसपी देहात बृजेश श्रीवास्तव ने बताया कि वह इस मामले को गंभीरता से दिखवा रहे हैं। आरोपियों के खिलाफ कड़ाई के कार्रवाई कराई जा रही है।
66 हजार में पेशगी पर दी जानी चाहिए जमीन
-तमाम कानूनी पेशगी पर देने के कम से कम रेट तीन हजार रुपये बीघा हैं। वक्फ की जिस बाइस बीघा जमीन को लेकर विवाद है, उसके मुतवल्ली इमानदारी के किसी को पेशगी पर दें एक साल में उसके करीब 66 हजार रुपये मिलेंगे। लेकिन पर्वत इस जमीन को मात्र दस हजार में लेते चले आए थे। पिछले दो साल से नाजिम ने चार हजार रुपये बढ़ाकर इसी जमीन को ले लिया तो उन्हें बुरा लग गया। हालांकि नाजिम ने भी कुछ खास रकम नहीं बढ़ाई। मुफ्त में जमीन लेने की इस लड़ाई का वक्फ अधिकारी भी तमाशा ही देख रहे हैं। लड़ाई के बाद हाल यह है कि नाजिम और पर्वत इस जमीन को एक लाख तक में लेने को तैयार हैं।
आठ माह पूर्व भी चली थी गोली
वक्फ की इस जमीन को अपने कब्जे में लेने की होड़ में मुकदमा में फैसला होने के बाद दोनों पक्षों में 26 अक्तूबर 14 की शाम को जमकर फायरिंग हुई थी। फायरिंग की आवाज सुनकर तत्कालीन चीता मोबाइल पर तैनात राजवीर सिंह यादव और उसके साथी ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला था। पुलिस कर्मियों ने लाठी व पत्थर खाने के बाद एक पौनिया समेत दो असलाह कब्जे में लेकर पुलिस बुलाई थी। इससे भयभीत होकर दोनों पक्षों के लोग भाग गये थे। नाजिम अली ने पर्वत,शब्लू, इशरत,अनवर के खिलाफ हत्या करने के प्रयास में मुकदमा दर्ज करवाया था।