इलाके में बंदरों के हमले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। शुक्रवार को एक और महिला पर बंदरों के झुंड ने हमला कर दिया। वह छत में गेहूं सुखा रही थी। बचने के लिए उसने छत में इधर-उधर दौड़ लगाई मगर बंदर उस पर चिपट पड़े। डरी सहमी महिला चीखकर मदद की गुहार लगाती रही। अचानक उसका पैर फिसल गया और छत से गिर गई। आनन-फानन में उसे अस्पताल ले जाया गया जहां उसने दम तोड़ दिया।
घटना सुबह आठ बजे की है। कस्बे के इशहाक अहमद की 65 साल की पत्नी वातुलन छत पर गेहूं सुखाने गई थी। अचानक वहां बंदरों का झुंड आ गया। आसपास की छतों पर मौजूद लोगों के अनुसार वतूलन ने डंडा उठाकर बंदरों को भगाने की कोशिश की मगर झुंड पर उस पर दौड़ पड़ा। वह मदद इधर-उधर दौड़ती रही। आसपास के लोगों ने भी शोर मचाकर बंदरों को भगाने की कोशिश की। अचानक संतुलन खोने पर वातुलन छत से गिर गई। इस पर घर में कोहराम मच गया। लोगों की भीड़ जमा हो गई। सिर में गंभीर चोट आने से वह बेहोश हो गई। आनन-फानन में उसे नवाबगंज के एक अस्पताल में ले जाया गया जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।
बंदरों के लगातार हमले से कस्बे के लोगों में गुस्सा है। उन्होंने वन विभाग पर जिम्मेदारी से भागने का आरोप लगाया है। बंदर अब तक छह से ज्यादा लोगों पर हमला कर चुके हैं। प्रधान के पिता अब्दुल मजीद पर भी10 दिन पहले हमला कर दिया था। बंदरो ने उन्हें कई जगह काटा था। दो महीने पहले रहीश अहमद पर हमला बोला तो वह जीने से गिर गए थे। उनका हाथ टूट गया था। शकील अहमद पर एक सप्ताह पहले बंदरों का शिकार होकर लहूलुहान हो गए थे। इरशाद अहमद पर भी बंदर हमला कर चुके हैं। सपा नेता मुस्ताक अंसारी ने बंदरों के बढ़ते हमले पर रोष जताकर वन विभाग को जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि बार-बार कहने के बाद भी बंदरों को पकड़ने के प्रयास नहीं हो रहे हैं।