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अब सुलह-समझौतों की तलाशी जा रही गुंजाइश

Sat, 06 Jun 2015 02:07 AM IST
बरेली
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 करमपुर चौधरी के जामे शाह शराफत मदरसे में जलसे पर पथराव होने की घटना के बाद आमने-सामने आए रजवी और सकलैनियों में समझौते की बात होने लगी है। दोनों पक्षों के जिम्मेदार लोगों का कहना है कि कौम के विवाद सड़कों पर आने के बजाए मौअज्जिज लोगों के बीच बैठकर हल निकलना चाहिए। गौरतलब है कि आरोपियों की गिरफ्तारी न होने पर हजरत शाह सकलैन एकेडमी के सरपरस्त मुमताज मियां ने सड़कों पर उतरने का ऐलान कर दिया था। इसके बाद ही तल्खी और बढ़ गई थी। शुक्रवार को इस गरमाहट पर को खत्म करने के प्रयास शुरू करने जैसी हवा चली है। दोनों सिलसिलों की ओर से आए बयानों में सुलस समझौते का रास्त निकालने की गुंजाइश दिख रही है।
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मैं अपनों को भी मना लूंगा
-सकलैनी हमारे सुन्नी भाई हैं। करमपुर चौधरी गांव में मदरसे के दौरान जो विवाद हुआ था, उसके लिए किसी को सड़कों पर उतरने की जरूरत नहीं है। हम सब बुजुर्गों को मानने वाले हैं। शनिवार के बाद हम आपस में बैठकर फैसले का कोई रास्ता निकालेंगे। सुन्नियत के लिए वह अपनों को भी राजी कर लेंगे-मौलाना तसलीम मियां, नबीर-ए-आला हजरत

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हम सुन्नी हैं, तसलीम मियां आएंगे तो जिस मुकाम पर हैं उनकी मेहमान नवाजी भी होगी। सुलह की बात होगी तो किसी से बाहर नहीं है। हम खुद चाहते हैं कि मुसलमानों के मसले सड़कों पर आने के बजाए घरों में ही तय हो जाएं। वरना आने वाली नस्लों पर बुरा असर पड़ेगा- मुमतजा मियां, सरपरस्त, हजरत शाह सकलैन एकेडमी
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मस्जिद का ताला खोलने की उठने लगी बात
-कुतुबखाना मस्जिद का विवाद अभी शांत नहीं हुआ है। दोनों मसलकों के लोग मस्जिद पर कब्जे को लेकर दिल्ली से लखनऊ तक लगे हुए हैं। अदालत का सहारा भी लेने की तैयारी की जा रही है। मस्जिद में ताला लगने से दोनों मसलकों के लोगों में आक्रोश हैं। बरेलवी मसलक के लोगों ने मुख्य मंत्री से मिलने के लिए समय मांगा है। देवबंदी मसलक के लोग भी मुख्यमंत्री से मिलने के लिए लखनऊ में ही हैं।
मोहल्ला आजमनगर की हरी मस्जिद में इमाम मौलाना जाहिद रजा ने बैठक करके कुतुबखाना मस्जिद का ताला खुलवाने की मांग की। उनका कहना है कि अंजुमन इस्लामियां को मस्जिद में इमाम रखने का हक है। अंजुमन ने इमाम रख दिया। अब किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। प्रशासन को चाहिए कि वह मस्जिद का ताला खुलवाकर इमाम को नमाज पढ़वाने की व्यवस्था कराए। किसी की कब्जाई गई जगह पर नमाज पढ़ना और पढ़ाना ही जायज नहीं है। उन्होंने कहा कि रमजान शरीफ का महीना आ रहा है। इन दिनों में मस्जिद में ताला पड़ा रहना अच्छी बात नहीं है। इसके लिए प्रशासन को कुछ करना चाहिए। उधर देवबंदी पक्ष के दारूल इशातुल उलूम के प्रबंधक  मौलाना इस्लाम का कहना है कि  मस्जिदखुदा का घर है, वह जब चाहेगा ताला खुल जाएगा। हम फिलहाल इस मामले में कुछ नहीं बोलेंगे।

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प्रशासन कोई बीच का रास्ता निकाले
-अंजुमन इस्लामियां सही है या दूसरे मसलक के लोग यह बात तो कोर्ट में तय हो जाए। लेकिन तब तक प्रशासन को पहल करके कोई ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए कि मस्जिद का ताला खुल जाए। क्योंकि मस्जिद का ताला बंद होना अच्छी बात नहीं है। इससे दोनों ही मसलकों के लोगों में गुस्सा बढ़ रहा है। इसके लिए रास्ता यही है कि नमाज पढ़ाने के लिए कोई ऐसी व्यवस्था की जाए कि दोनों मसलकों के लोगों को मंजूर हो। यह व्यवस्था लागू करने से पहले यह भी तय हो जाए कि कोर्ट का जो फैसला आएगा वह दोनों को मान्य होगा- शब्बू मियां, प्रबंधक खानकाहे नियाजिया

मौलाना इम्तियाज की जमानत पर सुनवाई 17 को होगी
बरेली। कुकर्म के आरोप में जेल गए कुतुबखाना मस्जिद के इमाम इम्तियाज हुसैन की जमानत प्रार्थनापत्र पर आज सुनवाई नहीं हो सकी। जमानत अर्जी पर अब अपर सत्र न्यायाधीश कक्ष सं. 11 ज्योति कुमार त्रिपाठी के न्यायालय में सुनवाई 17 जून को होगी।
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