डीएम के आदेश और उसके बाद बरेलवी मसलक के लोगों के आक्रोश को देखते हुए कुतुबखाना स्थित मस्जिद में पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों ने किले जैसी सुरक्षा कर दी र्थी। हालात सामान्य होने तक वहां सुरक्षा बनी रहेगी। देर रात तक लोगों के वहां जाने पर प्रतिबंध रहेगा।
डीएम की ओर से दोपहर बाद करीब चार बजे नमाज के लिए मस्जिद का ताला खोलने का ऐलान होते ही कुतुबखाना चौराहे पर शाम साढ़े चार बजे ही फोर्स इकट्ठा होनी शुरू हो गई। सात पुलिस क्षेत्राधिकारियों के अलावा 100 से अधिक इंस्पेक्टर और दरोगा वहां मुस्तैद थे। खुफिया विभाग की दरगाह आला हजरत पर भीड़ होने की खबर मिलते ही पुलिस के आला अफसरों ने चौक सी और बढ़ा दी। सीओ सिटी प्रथम मुकुल द्विवेदी, सीओ तृतीय असित श्रीवास्तव, सीओ द्वितीय धर्म सिंह मार्छाल और सीओ चतुर्थ स्नेहलता और बाहर से आए अफसर पहले से कुतुबखाना की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाले थे। दरगाह आला हजरत से बरेलवी मसलक के लोगों के किसी भी समय कुतुबखाना पर कूज करने की संभावना को देखते ही एसपी सिटी राजीव मल्होत्रा खुद कुतुबखाना पहुंच गए। उन्होंने कुतुबखाना की तरफ आने वाले रास्तों की नाकाबंदी करा दी गई। बिहारीपुर ढाल के पास बैरियर लगाकर आसपास के लोगों को कुतुबखाना की तरफ जाने से रोक दिया गया। भारी पुलिस बल देखकर दुकानदार घबरा गए। एक के बाद एक दुकानें बंद होती गई। इस तरह पूरा बाजार बंद हो गया। कड़े पहरे के बीच मस्जिद का ताला खोलकर दुकानदारों ने नमाज अदा की। कुतुबखाना चौराहे पर फोर्स के अलावा कुछ नजर नहीं आ रहा है।
... और दरगाह में भीड़ जुटती गई
बरेली। कुतुबखाना मस्जिद के बारे में डीएम के फैसले के बाद बरेलवी मसलक के लोगों में आक्रोश फैल गया। दरगाह आला हजरत के सज्जादानशीन के आवास पर लोगों की भीड़ इकट्ठा होने लगी। इससे पहले ख्वाजा कुतुब में मौलाना अदनान मियां के यहां भी काफी तादाद में लोग इकट्ठा होकर दरगाह पहुंच गए। वहां काफी देर बैठक का दौर चलता रहा।
पूर्व सज्जादानशीन मौलाना सुब्हान रजा खां (सुब्हानी मियां) ने डीएम के फैसले का विरोध किया। शाम सवा सात बजे वह पूर्व सज्जादानशीन सुब्हानी मियां की अगुवाई में सज्जादानशीन मौलाना अहसन रजा खां, मौलाना तसलीम रजा खां, मौलाना अदनान रजा खां, मुफ्ती मोहम्मद सलीम और आईएमसी के प्रवक्ता डॉक्टर नफीस अहमद समेत सैकड़ों लोगों ने वहां से डीएम के आवास की तरफ पैदल की कूच कर दिया। सुब्हानी मियां के आक्रोश की बात सुनकर पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों के हाथ पैर फूल गए।
दरगाह से बरेलवियों की भीड़ जैसे ही मोहल्ला सौदागरन वाली गली से कुतुबखाने की तरफ बढ़ी तो पुलिस ने रोक लिया। यहां से काफिला बिहारीपुर ढाल पहुंच गया। वहां सुब्हानी मियां ने भीड़ से निकलकर आला हजरत मस्जिद में मगरिब की नमाज अदा की। नमाज के बाद मस्जिद में भी अगली रणनीति तय करने के बाद सुब्हानी मियां ने भीड़ के साथ कोतवाली घेर ली। उनका कहना है कि डीएम का फैसला गलत है। मस्जिद बरेलवी मसलक के लोगों की है। रात करीब दस बजे डीएम ने आदेश किया कि कुतुबखाना स्थित मस्जिद में स्थाई समाधान न होने तक कोई भी नमाज अदा नहीं करेगा।
दरगाह पर हाजिरी देकर निकले सुब्हानी मियां
-डीएम के फैसले के खिलाफ जंग का ऐलान करते हुए खानदान के लोगों के साथ सड़क पर उतरे हजरत मौलाना सुबहान रजा खां(सुब्हानी मियां) दरगाह आला हजरत पर हाजिरी देने के बाद ही निकले थे। सौदागरान से निकलने के बाद कई जगह उन्होंने अपने मुरीदों के साथ मशविरा किया और आगे बढ़ते गए।
तौकीर को रिहा कराने भी निकले थे
-सुब्हानी मियां का सरकार और प्रशासन के खिलाफ यह दूसरी जंग हैं। 2010 में दंगे के दौरान मौलाना तौकीर रजा खां की बसपा सरकार में पुलिस ने गिरफ्तारी कर ली थी। सुब्हानी मियां उनकी रिहाई कराने के लिए सड़क पर उतर गए थे। सरकार को उनकी बात माननी पड़ी थी और तौकीर रजा को रिहा कर दिया गया था।