कुतुबखाना मस्जिद में मुअज्जिन (अजान देने वाले) को ही नमाज पढ़ाने के डीएम के आदेश मिलते ही देवबंदियों ने दोपहर बाद खुशी में एक दूसरे को मुबारकबाद दी। मिठाइयां भी बंटी। कुछ लोग कुतुबखाने में भी मिठाई बांटने जा रहे थे लेकिन उन्हें रोक लिया गया। देवबंद मदरसे पर भी जश्न का माहौल था। किसी अनहोनी की आशंका से पुलिस फोर्स मुस्तैद रहा।शाम को जैसे ही हालात बिगड़ने की सूचना मिली लोग सहमते चले गए और रात को नया फैसला होने के बाद तो सन्नाटे जैसी स्थिति थी। आम तौर पर देर तक खुलने वाली दुकानें भी बंद हो गई।
सुबह से ही सभी की निगाहें फैसले पर टिकी थीं। डीएम एसएसपी ने दोनों पक्षों को डीएम के कैम्प कार्यालय बुलाया। जैसे ही डीएम ने कुतुबखाना मस्जिद में इमाम की नियुक्ति न होने तक वहां (अजान देने वाले) मुअज्जिन ही नमाज पढ़ानेे का आदेश सुनाया तो जहां बरेलवियों में गुस्सा पनप गया, वहीं देवबंदियों के चेहरे खिल उठे। आदेश का जिक्र पूरे शहर में चंद मिनटों में फैल गया। सराय खाम समेत देवबंदियों के सभी इलाकों में जश्न का माहौल हो गया। देवबंदी जश्न एक दूसरे को मुबारकबाद देते नजर आए। सराय खाम स्थित मदरसा इस्लामिया अरबिया इशाअतुल उलूम के बाहर मौजूद लोग एक दूसरे को मुबारकबाद देते नजर आए। जमीतउलमा हिन्द के महानगर अध्यक्ष हाफिज मोहम्मद आसिफ, सचिव मोहम्मद आकिल आदि ने कहा कि वह डीएम के फैसले का स्वागत करते हैं। इसका सभी को सम्मान करना चाहिए। देर रात जब फैसाल बदला तो देवबंदी मसलक से जुड़े लोगों ने इस पर टिप्पणी करने से परहेज किया। लोग आपस में णशवरा करते जरूर नजर आए।
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प्रतिक्रया रोकने के लिए पहले से थी तैयारी
बरेली। कुतुबखाना मस्जिद के बारे में डीएम का फैसला आने से पहले से ही पुलिस फोर्स अलर्ट हो गया था। पीलीभीत, शाहजहांपुर, बदायूं के फोर्स के साथ एक कंपनी पीएसी बल कुतुबखाना, सरायखाम, गली मनिहारन, आलमगिरीगंज आदि स्थानों पर डेरा डाले हुए थी। शाम को फैसला आने के बाद सतर्कता और बढ़ा दी गई। सरायखाम के साथ ही कुतुबखाना पर बेहद चौकसी बरती गई। बाजार बंद होने के बाद तो पुलिस ने कुतुबखाना की तरफ जाने वाले रास्ते पर प्रवेश बंद कर दिया। सराय खाम और जिला अस्पताल की ओर से कुतुबखाना जाने वालों को रोक दिया गया। डरे सहमे लोग तेजी से अपने घरों की तरफ जा रहे थे।