अब तक दो मस्जिदों को लेकर शहर में बरेलवी-देवबंदी आमने सामने आ चुके हैं जब कि कुतबखाना मस्जिद पर इससे पहले भी बवाल होते-होतेे बचा है।
मसलकी विवाद बरेली में काफी समय से चल रहा है। इसी कड़ी में सितंबर 2009 में अहमद अली तालाब की लाल मस्जिद पर कब्जेदारी को लेकर बरेलवी-देवबंदी के बीच बवाल हुआ था। इसमें पथराव फायरिंग तक हुई थी। इसमे कई लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज है। जिसका आज भी मुकदमा चल रहा है।
इसके बाद 2003 में जुलूसे मोहम्मदी के दौरान कुतबखान की इसी मस्जिद में दूसरे पक्ष के लोग मस्जिद में घुस गए थे। जिनको जुलूस आयोजन कमेटी के लोगों ने ही बाहर निकाला था। इसमें नदीमुल हसन शमसी का कहना है कि उस वक्त भी इस मस्जिद पर कब्जा करने की कोशिश की गई थी और बवाल होते से बचा था।
पहले उस मस्जिद को आबाद
करें जो वीरान हैं: सलाम
बरेली। देवबंदी मसलक के पक्षकार एवं मदरसा काशीफुल उलूम के प्रबंधक अब्दुल सलाम का कहना है कि दूसरों की मस्जिद पर कब्जा करने से बेहतर है कि पहले उन मस्जिदों को आबाद कर दें जो वीरान पड़ी है। इस तरह सड़कों पर कौम का मजाक बनाना उचित नहीं। उन्होंने कहा कि कुतबखाना मस्जिद बरसों से उनके मसलक की रही है इसके सारे सुबूत उनके पास है। वह इसे कागजों में साबित भी कर देंगे।
80 साल से देवबंदी इमाम
है कुतबखाना मस्जिद में
बरेली। मदरसा इशातुल उलूम के प्रबंधक अब्दुल सलाम खां का कहना है कि कुतबखाना मस्जिद में पिछले आठ दशक से देवबंदी मसलक के इमाम रहे हैं। जो सराय खाम स्थित मदरसा इशातुल उलूम से जाते रहे हैं। निर्वतमान इमाम मदरसा काशीफुल उलूस से गए थे। यह मदरसा भी देवबंद मसलक का है।
उन्होंने कहा कि 80 साल पहले तक उनकी जानकारी में है कि इमाम हाफिज अब्दुल्ला के इंतकाल के बाद मदरसा दारुल उलूम से इमाम और मुअज्जिन (अजान देने वाले) जाते रहे है। उनका वेतन अंजुमन इस्लामियां देती रही है। अब जो मौजूदा इमाम रहे उनको बांस मंडी सराय खाम स्थित मदरसा अरबिया काशीफुल उलूम की ओर से भेजा गया था। मोअज्जिन अब भी मदरसा इशातुल उलूम के ही हैं।
तो पुलिस तलाश रही है नया इमाम
-पुलिस ने बीच का रास्ता निकालने के लिए खुफिया तरीके से इमाम की तलाश शुरू कर दी है। देखा यह जा रहा है कि कोई ऐसा इमाम मिल जाए जिसकी नियुक्ति पर किसी को आपत्ति न हो। इसके लिए सीओ सिटी प्रथम ने बाहरी जिलों से भी संपर्क साधा जा रहा है। बुधवार को सीओ सिटी ने देवबंदी मसलक के लोगों से बात की है। देर शाम को बरेलवी मसलक के लोगों से बात करके वह मस्जिद का ताला खोले जाने के लिए कोई रास्ता निकाल रहे हैं।