डीआईजी आरकेएस राठौर के पुलिस लाइंस के रवींद्रालय सभागार शहर के बाहरी इलाके की कॉलोनियों के जिम्मेदार लोगों को बुलाया। यहां पुलिस के अधिकारी रिटायर फौजियों, पुलिस अधिकारियों और संभ्रात नागरिकों से क्राइम कंट्रोल में मदद करने को कहा। लोगों ने पुलिस की इस पहल को सराहते हुए कहा कि मदद किसकी पुलिस को हमारी बात भी सुननी चाहिए। हालांकि आईजी विजय सिंह यादव ने इसका जवाब भी हाथोंहाथ दे दिया। उनका कहना था कि लोगों को पुलिस की समस्याएं भी समझनी चाहिए।
मशहूर शायर वसीम बरेलवी ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहा कि समाज में नैतिकता की ताकत कमजोर होने से अपराध बढ़ा है। पुलिस के आला अफसरों ने शहर को देहात में सुरक्षा कमेटी बनाकर आम आदमी से सहयोग लेने की अच्छी पहल की है, लेकिन इन कमेटियों को सरकार से मान्यता मिलनी चाहिए। यह अधिकारी चले जाएं तो आगे आने वाले अफसर भी सुरक्षा कमेटियों को मान्यता देते हैं। कार्यक्रम में रिटायर सीओ सीके मिश्रा ने अपने साथियों की तरफ से पुलिस का सहयोग करने का वादा किया। एसएसपी धर्मवीर यादव मंच पर बोलने आए तो उन्होंने संभ्रांत लोगों के खचाखच भरे रवींद्रालय में बैठे लोगों से सीधा संवाद शुरू कर दिया। सीधे संवाद में दिशा स्कूल की प्रबंधक पुष्पा गुप्ता और उपाध्यक्ष उषा उप्पल ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए। उनका कहना था कि पुलिस आम आदमी की सुनती ही नहीं है। उनके स्कूल में चोरी होने पर आला अफसरों से कहलवाना पड़ा। कंट्रोल नंबर का फोन नहीं उठने की शिकायत भी आला अफसरों के सामने आई। यह भी कहा गया कि एफआईआर लिखाने के लिए गरीबों को काफी दिक्कत उठानी पड़ती है। आला अधिकारियों के फोन नहीं उठते हैं। कुछ लोगों ने बरेली पुलिस के काम की तारीफ भी की। आईजी आरोपों उदाहरण देकर जवाब दिए। उन्होंने बताया कि कुछ लोग फटे पुराने कपड़ों में आकर उन्हें भी चक्कर में डाल देते हैं। वह उनकी हालत देखकर बातों पर यकीन करने के बाद मुकदमा लिखाने के आदेश कर देते हैं। लेकिन बाद में मालूम होता है कि सच्चाई इससे अलग है। कंट्रोल रूम के लाइनें खराब होने की वजह से फोन नहीं उठ पाते हैं। उनके यहां अनुशासनहीनता करने वालों के खिलाफ जितनी कार्रवाई होती है, उतनी किसी विभाग में नहीं होती है। कार्यक्रम का संचालन सीओ असित श्रीवास्तव ने किया।
डीआईजी की पुस्तक का विमोचन
मशहूर शायर वसीम बरेलवी आईजी विजय सिंह मीना ने डीआईजी की सुरक्षा के उपाय नाम की पुस्तक का विमोचन करके आम आदमी को समर्पित कर दिया। वसीम बरेलवी ने कहा कि इस पुस्तक में डीआईजी साहब ने अपने जीवन के अनुभवों को लिखा है। यकीनन यह लोगों के लिए काम आएगा। रोहिलखंड मेडिकल कॉलेज के डायरेक्टर डॉक्टर अशोक अग्रवाल ने बताया कि उन्होंने दीदी नाम से एक कार्यक्रम चलाया था। हम हर तरह से पुलिस की मदद करने को तैयार हैं।
-पुलिस के प्रति अविश्वास की भावना को खत्म करना होगा। हम भी आपके बीच से ही निकलकर यहां आए हैं। वर्दी होने की वजह से लोगों की अपेक्षाएं ज्यादा होती हैं। मैं सामाजिक संस्थाओं के कहता हूं कि एक सिपाही की दिनचर्या पर रिसर्च कराकर देख लें। वह किस समय खाना खाता है, किस समय सोता है सारी हकीकत सामने आ जाएगी। वह चिड़चिड़ा क्यों हो जाता है, यह भी मालूम हो जाएगा- विजय सिंह मीना, आईजी
लोग नौकर कौन है, कहां से आया है इसका भी पता नहीं करते हैं। जबकि अक्सर आपराधिक वारदातों में नौकरों का हाथ निकलता है। किराएदार की सत्यापन कराने को भी लोग जरूरी नहीं समझते, जबकि बिजनौर में किराएदार ही थे जो खंडवा की जेल से भागे हुए आतंकी निकले। पॉश कॉलोनियों को बदमाश अपना ठिकाना आसानी से बना लेते हैं। पटना के डाक्टर दंपति को किडनेप करके बदमाश गोमती नगर में रख सकते हैं तो किसी भी कॉलोनी में पनाह ले सकते हैं। हमें अपने दूसरे कामों के साथ अपराध और अपराधी के बारे में भी सोचना चाहिए। कोई नया और संदिग्ध व्यक्ति मिले तो पुलिस को जरूर बताएं। उन्होंने बताया कि सुरेेश शर्मा नगर में आने-जाने के लिए 26 प्वाइंट हैं। महानगर में सुरक्षा के लिए गेट बनाया गया था। उसे तोड़कर सड़क बना दी गई। इस सड़क से रात-दिन ट्रैक्टर-ट्राली गुजर रही हैं-आरकेएस राठौर, डीआईजी