किला छावनी में मजदूरी के लेनदेन के विवाद में नशे में धुत राजमिस्त्री ने फंटी मारकर मजदूर का सिर फोड़ दिया। मजदूर को अस्पताल में भर्ती कराया गया लेकिन ज्यादा खून बह जाने से उसकी कुछ ही देर बाद मौत हो गई। पुलिस ने राजमिस्त्री और उसके नाबालिग बेटे के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया है। शव का पोस्टमार्टम कराकर मजदूर के परिवार को सौंप दिया गया है।
साड़ी (हरदोई) के गांव आदमपुर का रहने वाला 34 वर्षीय पिंकू किला छावनी में किराए के मकान में रहकर पड़ोस के ही राजमिस्त्री विजय बहादुर के साथ मजदूरी करता था। उसका बड़े भाई बब्बू का भी पड़ोस में ही पक्का मकान है। पुलिस के मुताबिक बुधवार रात करीब साढ़े आठ बजे विजय बहादुर अपने घर के पास बैठा दारू पी रहा था। इसी बीच पिंकू भी वहां पहुंच गया। पिंकू भी नशे में था। दोनों में मजदूरी की रकम को लेकर बहस होने लगी। पिंकू का कहना था कि वह 400 रुपये रोजाना के हिसाब से मजदूरी लेगा जबकि विजय बहादुर उसे सिर्फ 300 रुपये देने की बात कह रहा था। इसी विवाद में दोनों में गालीगलौज हो गई। शोरशराबा होने पर विजय का बेटा पिंकू भी आ गया। दोनों पिंकू से हाथापाई करने लगे। इसी बीच गुस्से में विजय अपने घर से प्लास्टर करने वाली फंटी निकाल लाया और पिंकू के सिर पर दे मारी। फंटी की चोट से पिंकू का सिर फट गया और वह लहूलुहान होकर चीखता हुआ मंदिर के सामने जमीन पर गिर पड़ा। रात 11 बजे सूचना मिली तो पुलिस ने मौके पर पहुंच गई। पिंकू को निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया लेकिन कुछ ही देर बाद उसकी मौत हो गई। पिंकू की भाभी गीता देवी ने रात को ही विजय बहादुर और उसके बेटे के खिलाफ जानलेवा हमला करने के आरोप में मुकदमा लिखा दिया था जिसे बुधवार सुबह पिंकू की मौत के बाद हत्या की धारा में तरमीम कर दिया गया। प्रभारी निरीक्षक कमरुल हसन खां ने बताया कि दोनों ही आरोपियों को पकड़ लिया गया है। बृहस्पतिवार को उन्हें जेल भिजवा दिया जाएगा।
लोगों ने समझौता कराया फिर भी नहीं माने
पुलिस के मुताबिक काफी देर तक पिंकू और विजय बहादुर के बीच कहासुनी हुई। हंगामा होने पर भीड़ तक इकट्ठी हो गई। लोगों ने दोनों को समझाकर एक बार शांत कर दिया लेकिन कुछ ही देर बाद दोनों फिर लड़ पड़े और नौबत यह आ गई कि फंटी से हमला करने राजमिस्त्री ने पिंकू की हत्या कर दी। पिंकू के बड़े भाई बब्बू ने बताया कि उसके पिता राजमिस्त्री थे। 20 साल पहले हरदोई छोड़कर उनका परिवार बरेली में आकर बस गया था।