साथ जीने-मरने के वादे तो तमाम लोग करते हैं लेकिन कृष्णगोपाल यह वादा निभा भी दिया। सोमवार की शाम पीलिया से जूझ रही उसकी पत्नी शीतल ने दम तोड़ा तो वह विक्षिप्त सा हो गया। पत्नी के शव से लिपटकर रोया, दीवार में अपना सिर मारता रहा और फिर बदहवासी के इसी आलम में घर से निकल गया। रात में ही उसने चनेहटी के पास ट्रेन से कटकर खुद भी जान दे दी। सुबह ट्रैक पर उसका कटा हुआ शव बरामद हुआ।
सुभाष नगर की राजीव कॉलोनी में रहने वाले कृष्ण गोपाल अपने पड़ोस में ही रहने वाली शीतल से दो साल पहले प्रेम विवाह किया था। शादी होने के बाद दोनों सुखद जिंदगी जी रहे थे। कुछ दिनों से शीतल की तबियत बिगड़ने लगी थी। लेकिन चूंकि वह आठ महीने की गर्भवती थी इसलिए वह कोई तेज दवा लेने के बजाय घरेलू नुस्खों से ही काम चला रही थी। उसकी हालत ज्यादा बिगड़ गई तो मजबूर होकर कृष्ण गोपाल उसे अस्पताल ले गया। तब पता लगा कि शीतल को पीलिया है। पीलिया से उसकी हालत इतनी बिगड़ चुकी थी कि अस्पताल वालों ने उसका इलाज करने से हाथ खड़े कर लिए।
सोमवार की दोपहर अस्पताल से लौटा दिए जाने के बाद निराश कृष्ण गोपाल शीतल को घर ले आया। फिर उसे किसी दूसरे अस्पताल में ले जाने के लिए लोगों से सलाह-मशवरा करने निकल गया। इसी बीच शाम को शीतल ने दम तोड़ दिया। घर लौटे कृष्ण गोपाल को शीतल लाश में तब्दील मिली तो वह होश खो बैठा। वह काफी देर उसके शव से लिपटकर बिलख-बिलखकर रोता रहा। विक्षिप्तों जैसी हालत में उसने दीवार से अपना सिर मारना शुरू किया तो जैसे-तैसे परिवार वालों ने उसे रोका। इसके बाद वह यह कहता हुआ निकल गया कि वह भी अब घर लौटकर नहीं आएगा।
परिवार वालों ने देर शाम तक कृष्ण गोपाल का इंतजार किया और फिर शीतल के शव को ले जाकर रामगंगा के किनारे दफना दिया। मंगलवार सुबह जीआरपी से परिवार के लोगों को सूचना मिली तो कृष्ण गोपाल ने ट्रेन से कटकर आत्महत्या कर ली है। उसका क्षतविक्षत शव चनेहटी से नकटिया पुल की ओर ट्रैक पर मिला। जीआरपी ने शव का पोस्टमार्टम कराया। कृष्ण गोपाल के भाइयों ने उसकी भी अंत्येष्टि कर दी। परिवार के लोगों ने बताया कि कृष्ण गोपाल किराये पर टेंपो चलाता था। उसकी और शीतल की बिरादरी अलग-अलग थी इसलिए दोनों के परिवार इस शादी के लिए रजामंद नहीं थे लेकिन जब लाख समझाने पर भी दोनों नहीं माने तो शीतल के परिवार वालों ने उसे शादी करने की इजाजत दे दी, हालांकि वे खुद इस शादी में शामिल नहीं हुए। हालांकि अब सबकुछ सामान्य हो चुका था। कृष्ण गोपाल और शीतल दोनों बेसब्री से अपने घर में नया मेहमान आने का इंतजार कर रहे थे।